जानिए! क्यों है बैकुंठ चतुर्दशी का इतना महत्व, कैसे करना चाहिए ये व्रत

Samachar Jagat | Thursday, 22 Nov 2018 02:57:33 PM
Know why is the importance of Baiukth Chaturdashi

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धर्म डेस्क। कार्तिक मास के शुल्क पक्ष की चतुर्दशी को बैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन बैकुंठाधिपति भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार जब भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से चार माह के लिए शयन पर जाते हैं तो वे इस अवधि में अपना कार्यभार भगवान शिव को संभला देते हैं। इन चार मासों में शिवजी ही श्रृष्टि का संचालन करते हैं और जैसे ही देव निंद्रा से जागते हैं तो शिवजी पुन: उन्हें उनका कार्यभार संभलाते हैं।


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ये माना जाता है कि बैकुंठ चतुर्दशी का दिन वही दिन होता है जब शिवजी भगवान विष्णु को उन्हें उनका कार्यभार संभलाते हैं। इस दिन अगर भगवान विष्णु की पूरे विधि - विधान से पूजा की जाए तो व्यक्ति को सांसारिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कैसे करनी चाहिए इस दिन पूजा......

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शास्त्रों के अनुसार बैकुंठ चतुर्दशी के दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटो को लाल कपड़ा बिछी चौकी पर रखकर पूजा प्रारंभ करनी चाहिए। भगवान के समक्ष दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहकर पूजा करें और शाम को भगवान विष्णु को कमल के फूल ​अर्पित करें। इसके बाद आरती करें और इस मंत्र का जाप करें

विना यो हरिपूजां तु कुर्याद् रुद्रस्य चार्चनम्।
वृथा तस्य भवेत्पूजा सत्यमेतद्वचो मम।।

( ये सभी जानकारियां शास्त्रों और ग्रंथों में वर्णित हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले किसी विशेष पंडित या ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लें। )

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