स्कंदमाता की पूजा करने से व्यक्ति को मिलता से समस्त पापों से छुटकारा

Samachar Jagat | Wednesday, 10 Apr 2019 12:55:59 PM
Navaratri fifth day By worshiping skandmata one gets rid of all sins

धर्म डेस्क। नवरात्र के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता की पूजा करने से व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार चाहे जितना भी बड़ा पापी क्यों ना हो अगर वह नवरात्र के पांचवे दिन सच्चे मन से स्कंदमाता की पूजा करता है तो उसके सारे दोष और पाप नष्ट हो जाते हैं।

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स्कंदमाता का स्वरूप बहुत ही मोहक है और इनकी चार भुजाएँ हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में हैं तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प लिए हुए हैं। स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। 

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स्कंदमाता की अलसी औषधी के रूप में भी पूजा होती है। अलसी एक औषधि है जिससे वात, पित्त, कफ जैसी मौसमी रोग का इलाज होता है। अतः स्कंदमाता रोगों से मुक्ति दिलाती हैं। स्कंदमाता की पूजा करते समय विशेष मंत्र का जाप करें ये मंत्र है ....

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमरू।। 

( ये सभी जानकारियां शास्त्रों और ग्रंथों में वर्णित हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले किसी विशेष पंडित या ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लें। )

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