नवरात्र पांचवा दिन : अलसी औषधि के रूप में होती है स्कंदमाता की पूजा

Samachar Jagat | Sunday, 14 Oct 2018 07:30:01 AM
Navaratri fifth day:   Skandamata worship is in the form of linseed medicine

धर्म डेस्क। नवरात्र का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है, मां के हर रूप की तरह यह रूप भी बेहद सरस और मोहक है। स्कंदमाता अपने भक्त को मोक्ष प्रदान करती है। चाहे जितना भी बड़ा पापी क्यों ना हो अगर वह मां के शरण में पहुंचता है तो मां अपने भक्त के सारे दोष और पाप को दूर कर देती हैं। तीनों लोक के स्वामी भगवान शिव और मां पार्वती के पुत्र कार्तिक को भगवान स्कंद भी कहा जाता है। इसलिए भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गाजी के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।

स्कंदमाता का स्वरूप :-

स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं, इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प लिए हुए हैं। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है, ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।

सिंह इनका वाहन है, नवदुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की अलसी औषधी के रूप में भी पूजा होती है। स्कंद माता को पार्वती एवं उमा के नाम से भी जाना जाता है। अलसी एक औषधि है जिससे वात, पित्त, कफ जैसी मौसमी रोग का इलाज होता है अतः स्कंदमाता रोगों से मुक्ति दिलाती हैं।

मां स्कंदमाता की पूजा करते समय विशेष मंत्र का जाप करें, ये मंत्र है...

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)



 

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