पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन किया जाता है तर्पण

Samachar Jagat | Tuesday, 09 Oct 2018 09:24:57 AM
On the last day of the Shraadh side, the Tarpan is done

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धर्म डेस्क। पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन तर्पण किया जाता है, श्राद्ध पक्ष की अमावस्या के दिन तर्पण करने से पितरों को मुक्ति मिलती है, इसके साथ ही इसी दिन श्राद्ध पक्ष समाप्त हो जाता है। शास्त्रानुसार वैसे तो प्रत्येक अमावस्या पितृ की पुण्य तिथि होती है परंतु आश्विन मास की अमावस्या पितृओं के लिए परम फलदायी कही गई है। इसे सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या अथवा महालया के नाम से जाना जाता है। इस दिन सभी पितरों का तर्पण करने की परंपरा है। जिनको अपने पितर की मृत्यु तिथि नहीं मालूम हो, वे इस दिन उनका तर्पण कर सकते हैं।

तर्पण पुत्र या पुत्री दोनों ही सकते हैं। पितृकुल के साथ मातृकुल के पितरों का भी तर्पण किया जाता है। जिन पितरों का जलतर्पण किया गया, उनको सम्मानपूर्वक विदाई दी जाएगी। स्नान के बाद हाथ में जल, तिल व कुश लेकर दक्षिणमुख होकर पितरों को याद करते हुए उन्हें जल अर्पित किया जाता है। उनसे परिवार में सुख-शांति और सदैव कृपा बरसाने की कामना की जाती है।

पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण करने से तीन तरह के ऋण देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। आश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ का पृथ्वी पर निवास होता है, इस काल में वे अपने घर व संबंधियों के आस-पास रहते है, अतः अश्विन अमावस्या को पितृ उत्सव कहा गया है। इस दिन पितृ के निमित पिंड, तर्पण, श्राद्ध हेतु सर्वश्रेष्ठ महूर्त गज छाया कहा गया है। 

( इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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