गुरूवार को पूजा करते समय करें इस खास मंत्र का जाप, घर में नहीं होगी धन-संपदा की कमी

Samachar Jagat | Thursday, 11 Apr 2019 02:22:10 PM
Please chant this special mantra while worshiping on Thursday

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धर्म डेस्क। गुरूवार का दिन देव गुरू बृहस्पति का दिन माना जाता है, इस दिन अगर पूरे विधि-विधान से देवगुरू बृहस्पति की पूजा की जाए तो वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। अगर आप गुरूवार का व्रत रखते हैं तो आपको इस दिन एक खास मंत्र का जाप करने से देव गुरू बृहस्पति जल्दी ही प्रसन्न होते हैं और भक्त पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं आइए जानते हैं गुरूवार के इस खास मंत्र और गुरू पूजा की विधि के बारे में ........

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गुरुवार को सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि से निवृत्त होकर पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात पूजा प्रारंभ करें, सबसे पहले चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर इस पर गुरु बृहस्पति की मूर्ति या तस्वीर रखकर पूजा प्रारंभ करें।

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भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। पूजा में केसरिया चंदन, पीले चावल, पीले फूल और भोग के लिए पीले लड्डू या बर्फी का उपयोग करें, साथ ही गुरुवार की व्रत कथा का पाठ करें। 

पूजा के जल में हल्दी और चने की दाल डालकर केले के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं।

गुरूवार के दिन पीली चीजों का दान करना चाहिए जैसे हल्दी, चने की दाल, आम, केला, सोने आदि।

व्रत में बिना नमक का खाना खाएं और कोशिश करें कि खाने में पीले रंग की चीजें जैसे आम, केले खाएं।

पूजा के बाद अपने माथे पर केसर या हल्दी का पीला तिलक लगाएं।

इसके बाद गुरु मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें, माना जाता है कि इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को धन-संपदा की कमी नहीं होती है। ये मंत्र इस प्रकार है .........

ऊँ बृं बृहस्पते नमः

इसके अलावा भी गुरू पूजा के कुछ और मंत्र हैं जिनका जाप करना लाभकारी रहता है, ये मंत्र इस प्रकार हैं ......

बीज मंत्र :-

ऊॅॅँ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

मां दुर्गा का आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए नवरात्र की पूजा करते समय राशिअनुसार पहनें इस रंग के कपड़े 

मंत्र :-

ऊॅॅँ बृं बृहस्पये नमः
ॐ बृं बृहस्पतये नमः।
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।
ॐ नमोः नारायणाय। 
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः।
ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि। 
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। 
भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। 
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुतः पुरूत्रा शूर वृत्रहन्।
आ नो भजस्व राधसि। 

विशेष मंत्र :-

ॐ देवानां च ऋषीणां गुरुं कांचनसन्निभम।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्।। 

बृहस्पति की शांति के लिए वैदिक मंत्र :-

ऊॅँ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्बिभाति क्रतुमज्जनेषु। 
यद्दीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।।

बृहस्पति की शांति के लिए पौराणिक मंत्र :-

देवानां च ऋषीणां च गुरुं कांचनसंनिभम्। 
बुद्धिभूतं त्रिलोकशं तं नमामि बहस्पतिम्।।

( इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )

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