भगवान शिव के इस मंदिर में पहली बार मिले थे रावण और मंदोदरी

Samachar Jagat | Sunday, 12 Aug 2018 04:41:12 PM
Ravana and Mandodari met this temple of Lord Shiva for the first time

धर्म डेस्क। सावन माह में भारत के सभी मंदिरों में भगवान शिव की पूजा की जाती है, भोलेनाथ के कुछ मंदिर अपनी अनोखी खासियत की वजह से पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। इन्हीं मंदिरों में से एक है उत्तर प्रदेश के मेरठ सदर में स्थित बिल्वेश्वर नाथ शिव मंदिर, इस मंदिर में सावन के महीने में दूर - दूर से श्रद्धालु आते हैं। यहां के लोगों की मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से इस मंदिर में जाकर शिव आराधना करता है और भगवान शिव से कोई कामना करता है तो भोलेनाथ उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। 

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इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि ये मंदिर रावण और मंदोदरी के मिलन का गवाह है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी जगह पर बैठकर मंदोदरी ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी और मंदोदरी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग को सिद्धपीठ के नाम से भी जाना जाता है। वहीं मान्यताओं के अनुसार जब मंदोदरी इस शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए आती थीं तभी यहां पर रावण की उनसे भेंट हुई। 

रावण मंदोदरी के सौंदर्य को देख मोहित हो गया और उसने मंदोदरी से विवाह कर लिया। इसी कारण इस जगह को रावण का ससुराल भी कहा जाता है। जो भी इस मंदिर में आकर सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करता है भोलेनाथ उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। 

( इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )

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