इस मंदिर में साक्षात विराजमान हैं नागों के राजा तक्षक, दर्शन करने से मिलती है सभी प्रकार के सर्पदोषों से मुक्ति

Samachar Jagat | Tuesday, 02 Apr 2019 02:06:45 PM
Shiva Parvati is sitting on the seat of Nag in Nagchandreshwar temple

धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में नाग को देवता के रूप में पूजा जाता है और शिव को प्रसन्न करने के लिए नागदेवता की पूजा की जाती है। भगवान शिव हमेशा अपने गले में नाग को धारण करके रखते हैं। हम आपको यहां नागदेवता के एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं जो साल में सिर्फ एक दिन ही खुलता है। ये मंदिर उज्जैन के महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है और इसे नागचंद्रेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।

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यह मंदिर श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी यानि नागपंचमी के दिन ही खुलता है और माना जाता है कि इस मंदिर में नागों के राजा तक्षक विराजमान हैं। इस मंदिर में विराजित प्रतिमा का निर्माण 11वीं शताब्दी में नेपाल में किया गया था और इसके बाद इसे यहां लाकर स्थापित किया गया। नागचंद्रेश्वर मंदिर में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हुए हैं। 

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पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें भगवान विष्णु के स्थान पर शिव-पार्वती सर्प शय्या पर विराजमान हैं। जब एक दिन के लिए ये मंदिर नागपंचमी पर खुलता है तो यहां शिव-पार्वती के साथ विराजमान नागदेवता के दर्शनों के लिए लंबी लाइन लग जाती है। माना जाता है कि जो व्यक्ति इस मंदिर में आकर नागदेवता के दर्शन कर लेता है उसे सभी प्रकार के सर्पदोषों से मुक्ति मिल जाती है। 

(ये सभी जानकारियां शास्त्रों और ग्रंथों में वर्णित हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले किसी विशेष पंडित या ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लें।)

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