जो व्यक्ति कांवड़ लाता है उसे मिलता है अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर फल

Samachar Jagat | Sunday, 12 Aug 2018 04:05:22 PM
The person who brings Kawad gets it equal to doing Ashwamedh Yagya

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धर्म डेस्क। श्रावण मास में भगवान शिव का जल से अभिषेक किया जाता है और इसके लिए कांवड़िए नदियों से कांवड़ में जल लाकर भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं। वैसे तो पूरे माह ही भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ सावन के सोमवार पर देखने को मिलती है। लोग बांस की एक पट्टी के दोनों किनारों पर बांस से बनी टोकरियां अथवा कलश लगाकर रविवार को ही नदियों की ओर चल पड़ते हैं और नदियों से कांवड़ में गंगाजल भरकर पैदल-पैदल भगवान शिव के मंदिर में आकर शिवलिंग पर जल अर्पित करते है। 

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जब श्रद्धालु कावड़ में जल भरने के लिए जाते हैं तो पूरा माहौल शिव भक्ति में लीन रहता है। लोग नाचते-गाते हुए भोलेनाथ पर जल चढ़ाने के लिए कांवड़ लेकर निकलते हैं, ऐस में चारों ओर से हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देती है। आपको बता दें कि गंगाजल भरकर उसे अपने कंधे पर लेकर शिवलिंग पर चढ़ाने की परंपरा कांवड़ यात्रा कहलाती है। 

पुराणों में बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रावण मास मे शिव आराधना करता है और शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करता है भोलेनाथ उससे प्रसन्न होकर उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।  कांवड़ को कंधे पर रखकर हर हर महादेव और बम बम भोले का नारा लगाते हुए चलना भी पुण्यदायक माना जाता है। ये माना जाता है कि जो व्यक्ति कांवड़ लेकर आता है और उसके जल से भोलेनाथ का अभिषेक करता है, उसे अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है। 

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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