जानिए! क्यों इन तिथियों को नहीं तोड़ना चाहिए बेलपत्र

Samachar Jagat | Monday, 11 Jun 2018 07:00:01 AM
These dates should not be broken belpatra

धर्म डेस्क। शिव पूजा और बेलपत्र का संबंध काफी पुराना है। जब भी भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। उस समय भोलेनाथ को बेलपत्र चढ़ाना आवश्यक होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि शिव पूजा में बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है। किस दिन बेलपत्र को तोड़ना सही नहीं होता है। हम आपको बताते हैं भगवान शिव की पूजा और बेलपत्र के महत्व के बारे में .......

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शिव पूजा में क्यों जरूरी है बेलपत्र :-

शिव उपासना में बेलपत्र का चढ़ावा पापनाशक व सांसारिक सुखों को देने के नजरिए से बहुत अहमियत रखता है। खासतौर पर सोमवार को बेलपत्र का चढ़ावा मनोरथ सिद्धि का श्रेष्ठ उपाय है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सोमवार का दिन शिव-शक्ति का खास दिन है। बेल वृक्ष में शिव व शक्ति स्वरूपा देवी लक्ष्मी का वास माना गया है और शिव-शक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे माने गए है। इसी कारण सोमवार के दिन या भगवान शिव की विशेष पूजा में भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करना शुभ फलदायक होता है।

इन तिथियों को न तोड़ें बेलपत्र :-

शास्त्रों के अनुसार, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति (सूर्य का राशि बदल दूसरी राशि में प्रवेश) तिथियों और सोमवार के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। 

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बेलपत्र न होने पर शिव पूजा में करें ये उपाय :- 

बेलपत्र शिव पूजा का अहम अंग है, इसलिए इन दिनों में बेलपत्र न तोडने के नियम के कारण बेलपत्र न होने पर नए बेलपत्रों की जगह पर पुराने बेलपत्रों को जल से पवित्र कर शिव पर चढ़ाए जा सकते हैं या इन तिथियों के पहले तोड़ा बेलपत्र चढ़ाएं।

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)



 

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