श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार व्यक्ति की बर्बादी कारण बनते हैं उसके अंदर के ये तीन दोष

Samachar Jagat | Monday, 22 Apr 2019 08:35:30 AM
These three defects are formed inside the person Person ruination reasons

धर्म डेस्क। श्रीमद्भगवद्गीता में बताया गया है कि कैसे मनुष्य की बर्बादी का कारण उसकी तीन आदतें बनती हैं। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर ये तीन अवगुण होते हैं लेकिन जो व्यक्ति इन पर नियंत्रण पा लेता है वह दुख और परेशानियों से बचा रहता है वहीं जो व्यक्ति इन तीन दोषों पर नियंत्रण नहीं कर पाता है वह बर्बाद हो जाता है। आखिर वे कौनसे तीन कारण होता है जो व्यक्ति की बर्बादी की वजह बनते हैं आइए आपको बताते हैं इनके बारे में ...............

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प्रत्येक व्यक्ति के अंदर का सबसे पहला अवगुण होता है उसकी इच्छाएं, जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं को नियंत्रण में नहीं रख पाता है वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं होता है। क्योंकि जैसे ही उसकी एक इच्छा पूरी होती है वह दूसरी की ओर आगे बढ़ने लगता है और दूसरी पूरी होने के बाद तीसरी इच्छा मन में जाग्रत होती है। इच्छाओं पर नियंत्रण न होने के कारण व्यक्ति जीवनपर्यन्त इसी जाल में उलझा रहता है और दुखी रहता है।

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वहीं अगर व्यक्ति की कोई इच्छा पूरी नहीं होती है तो उसे अत्यधिक क्रोध आता है और जिसकी वजह से वह कई बार गलत निर्णय ले लेता है जो उसकी बर्बादी का कारण बनता है। इस प्रकार व्यक्ति के अंदर का दूसरा अवगुण होता है क्रोध।

अब बात करते हैं तीसरे अवगुण की तो आपको बता दें कि व्यक्ति के अंदर का तीसरा अवगुण होता है लालच, जैसे ही व्यक्ति की एक इच्छा पूरी होती है उसका लालच बढ़ता जाता है और उसके मन में और कई आकांक्षाएं जन्म लेने लगती हैं, जो उसकी बर्बादी का कारण बनती हैं।

(आपकी कुंडली के ग्रहों के आधार पर राशिफल और आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में भिन्नता हो सकती है। पूर्ण जानकारी के लिए कृपया किसी पंड़ित या ज्योतिषी से संपर्क करें।)

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