जानिए! क्यों कुछ जगहों पर रंग-गुलाल के बजाय होलिका की राख से लोग खेलते हैं होली

Samachar Jagat | Thursday, 14 Mar 2019 01:59:05 PM
Why in some places people play holi from Holika Ash

धर्म डेस्क। होली का त्योहार जीवन में उमंग और खुशियां लेकर आता है, ये वो त्योहार होता है जब सभी गिले - शिकवे दूर कर एक-दूसरे के गले लगते हैं। जहां पूरे ​देश में लोग रंग और गुलाल से लोग होली खेलते हैं वहीं कुछ जगह ऐसी भी हैं जहां पर गुलाल के बजाय राख से होली खेली जाती है।

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राख से होली खेलने के पीछे लोगों की मान्यता है कि जब भवगान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद का वध करने के लिए पिता हिरण्यकश्यपु ने अपनी बहन होलिका को बुलाया तो उसने प्रहलाद को आग में जलाने का सुझाव दिया और प्रहलाद आग से बाहर न आ जाए इसलिए वह खुद उस आग में बैठ गई क्योंकि होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। 

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जब होलिका भक्त प्रहलाद को आग में लेकर बैठी तो प्रहलाद श्री हरी विष्णु के ध्यान में मग्न हो गए और गलत कार्य करने के कारण होलिका का वरदान उसके लिए अभिश्राप बन गया और वो आग में जल गई। वहीं भगवान विष्णु ने सुरक्षा कवच बनकर प्रहलाद की रक्षा की और वो आग से से सही सलामत निकल गए। प्रहलाद को जीवित देखकर लोगों ने होली की राख से एक - दूसरे को तिलक कर खुशियां मनाईं और इसी वजह से आज भी कुछ जगहों पर लोग होलिका की राख से होली खेलते हैं।

(ये सभी जानकारियां शास्त्रों और ग्रंथों में वर्णित हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले किसी विशेष पंडित या ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लें।)

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