जानिए! देवउठनी एकादशी पर क्यों किया जाता है तुलसी का शालिग्राम के साथ विवाह

Samachar Jagat | Saturday, 17 Nov 2018 05:44:14 PM
Why is Tulsi married to Shaligram on Devutthana Ekadashi

धर्म डेस्क। देवउठनी एकादशी पर अबूझ सावा होने के कारण शादियों की धूम तो रहती ही है, इसके साथ ही इस दिन तुलसी का भगवान शालिग्राम के साथ विवाह भी किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार अगर किसी के संतान या पुत्री न हो तो वो देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी का विवाह करे और उसका दान करे, ऐसा करने से उसे कन्यादान के बराबर फल मिलता है। 

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वहीं कुछ लोग पुण्य प्राप्ति के लिए भी तुलसी का विवाह इस दिन करते हैं। तुलसी का विवाह पूरे विधि विधान से किया जाता है और उसे वैसे ही दान - दहेज देकर विदा किया जाता है जैसे कोई अपनी पुत्री को विदा करता है। शालिग्राम को भगवान श्री हरी विष्णु का ही रूप माना जाता है और इसी कारण तुलसी को  विष्णुप्रिया कहा जाता है। 

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मान्यता है कि जब श्री हरि शयन के पश्चात देव उठनी एकादशी पर जागते हैं तो वे पहली प्रार्थना हरिवल्लभा तुलसी की ही सुनते हैं। इसी कारण जो व्यक्ति इस दिन तुलसी को प्रसन्न करता है वह श्री हरी की कृपा प्राप्त करता है। देव उठनी एकादशी के दिन संध्या काल में शालिग्राम रूप में भगवान श्री हरि का पूजन किया जाता है और इसके बाद विवाह की विधियां प्रारंभ होती हैं। कुछ लोग इस दिन व्रत भी करते हैं और तुलसी के पत्ते से व्रत का समापन करते हैं।  

(ये सभी जानकारियां शास्त्रों और ग्रंथों में वर्णित हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले किसी विशेष पंडित या ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लें।)

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