जानिए! यज्ञ करते समय क्यों बोला जाता है स्वाहा और क्या होता है इसका प्रभाव

Samachar Jagat | Thursday, 14 Mar 2019 09:38:52 AM
why we pronounce swah during yagya

धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में हवन या यज्ञ को बहुत महत्व दिया जाता है, माना जाता है कि जिस घर में नियमित रूप से यज्ञ होता रहता है उस घर से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। वहीं यज्ञ के दौरान मंत्रोच्चारण के अंत में अग्नि में कोई भी पदार्थ डालते समय स्वाहा बोला जाता है और माना जाता है कि अगर मंत्रोच्चारण के बाद स्वाहा न बोला जाए तो इससे यज्ञ पूरा नहीं होता है। आखिर क्यों मंत्रोच्चारण के बाद स्वाहा बोला जाता है आइए आपको बताते हैं इसके बारे में ...................

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पौराणिक कथा के अनुसार अग्निदेव का विवाह राजा दक्ष की बेटी स्वाहा से हुआ था और अग्निदेव सभी पदार्थ अपनी पत्नी स्वाहा के माध्यम से ग्रहण करते थे और इसी वजह से जब भी कोई पदार्थ अग्नि में डाला जाता है तो मंत्रोच्चारण के बाद स्वाहा कहा जाता है जिससे अग्निदेव प्रसन्न होकर उसे ग्रहण करें।

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वहीं मान्यताओं के अनुसार,  जब अग्नि में कोई भी पदार्थ डाला जाता है तो इसे अपने प्रिय देवता तक पहुंचाने के लिए स्वाहा बोला जाता है। जैसे ही अग्नि में पदार्थ डालकर स्वाहा बोला जाता है तो वह सीधा देवताओं तक पहुंच जाता है और देवता इसे ग्रहण कर प्रसन्न होते हैं। यदि यज्ञ के समय स्वाहा नहीं बोला जाता है तो ​अग्नि में चढने वाली वस्तुओं को देवता ग्रहण नहीं करते हैं।

(ये सभी जानकारियां शास्त्रों और ग्रंथों में वर्णित हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले किसी विशेष पंडित या ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लें।)

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