यदि समय रहते मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न दिया गया तो देश में डिप्रेशन की बीमारी भयावह रूप धारण कर लेगी

Samachar Jagat | Tuesday, 28 May 2019 02:58:31 PM
If meditative health is not taken care of in time Depression disease will take place in the country

चंडीगढ़। राजयोगिनी, शिक्षक ब्रहमकुमारी शिवानी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में भारत डिप्रेशन के मामले में पहले नंबर पर है। यदि समय रहते मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न दिया गया तो देश में यह बीमारी भयावह रूप धारण कर लेगी। बहन शिवानी ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा सभी का ध्यान केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर रहता है। लोग समझते हैं कि शरीर ही मन को कंट्रोल करता है लेकिन सच तो यह है कि मन का प्रभाव ही शरीर पर पड़ता है। लोगों की मानसिक स्थिति दिन ब दिन कमजोर होती जा रही है क्योंकि हमने अपनी मान्यता कुछ इस तरह बना ली है कि दुख, गुस्सा, चिंता हमें अपने मूल संस्कार लगने लगे हैं , जबकि हमारी मूल संस्कार तो शांति, पवित्रता, प्रेम, करूणा, सत्य, आनंद और खुशी है।

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उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में विकारों में फंस कर मनुष्य मूल संस्कारों को भूल गया है। परमात्मा को याद करते समय बुद्धि भटकती है तथा स्थिर मन -बुद्धि न होने से खुशी गायब हो जाती है। अब हमें अपने मूल संस्कारों को इमर्ज करने की जरूरत है । आत्मिक तथा असली स्वरूप में रहने का नाम ही ध्यान, योग है। उन्होंने बताया कि रोजमर्रा में जब हम किसी से मिलते हैं तो कहते हैं 'क्या हालचाल है, वस्तुत: जैसा मन होगा वैसी ही चाल हो जाती है । 

हाल हमेशा खुशहाल तथा चाल फरिश्ते जैसी होनी चाहिए। यह हरेक की वास्तविकता होनी चाहिए लेकिन यदि हमारी मन:स्थिति बाहरी बातों अर्थात दूसरों पर निर्भर होगी तो यह कभी संभव नहीं होगा क्योंकि यह तो पक्का है कि परिस्थिति कभी पूरी तरह हमारे अनुरूप नहीं होगी। कोई भी बाहरी वस्तु हमें स्थायी सुख नहीं दे सकती । उनके अनुसार हर माता पिता अपने बच्चे से प्रेम करते हैं, इसलिए कहते हैं कि हमें बच्चे की कोई फिक्र नहीं। समझने वाली बात यहां ये है कि फिक्र तथा केयर में अंतर है। केअर में सकारात्मकता का भाव है जबकि चिंता में नकारात्मकता का । 

आज जिंदगी में सब साधन होते हुए भी हर व्यक्ति अंदर से खाली है क्योंकि हमने अपनी खुशी दूसरों पर डिपेंडेंट कर दी। हमने अपने को दूसरों की प्रतिक्रिया का गुलाम बना दिया है। वो खुश तो हम खुश, वो नाराज तो हम भी नाराज । कभी तो हम अपने नक्षत्र को कोसते हैं कभी अपने भाग्य को।  ब्रहमकुमारी शिवानी ने कहा कि औरों की नकल करके हमें अपने संस्कार नहीं बनाने। मेरे मन का रिमोट मेरे पास ही होना चाहिए अर्थात हमें इमोशनली इंडिपेंडेंट नहीं होना है। दूसरों के संस्कार में उलझकर हमारी आत्मिक उन्नति संभव नहीं।

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उन्होंने पांच संस्कार बताए जिनमें पहला जिसे आत्मा पिछले जन्म से लेकर आती, दूसरे परिवार से मिलते, तीसरे समाज से मिलते । इच्छा शक्ति से आत्मा के संस्कार बदले जा सकते हैं । आत्मा के मूल संस्कार ज्ञान ,शांति ,पवित्रता , प्रेेम ,आनंद हैं जो हम भूल गए हैं । उन्होंने लोगों को सात्विक अन्न ग्रहण करने का आग्रह किया क्योंकि अन्न का मन पर प्रभाव, पानी का वाणी पर असर पड़ता है। परमात्मा की याद में ग्रहण किया भोजन तथा पानी मन तथा तन को शक्ति देता है। इस अवसर पर मन का सुख लेने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें सुना।-एजेंसी



 

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