ध्यान से देखिये यह फोटो देश के महान गणितज्ञ की है !

Samachar Jagat | Sunday, 17 Nov 2019 05:33:47 PM
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आप यह जो फोटो देख रहे हैं देश-दुनिया में गणित के फॉर्मूले का लोहा मनवाने वाले महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह की है .फोटो को संभाल कर रख लें .देश के इतने बड़े वैज्ञानिक के निधन के बाद शासन प्रशासन और नीतीश सरकार ने किस तरह उनकी उपेक्षा की यह उसका उदाहरण है .जीते जी सरकार की उपेक्षा का वे सालों तक शिकार रहे पर निधन के बाद ऐसा दृश्य देखने को मिलेगा यह किसी ने सोचा न था. नीतीश कुमार की सरकार में भी अधिकारियों ने जिस तरह का रवैया अपनाया, उसे शर्मनाक ही कहा जा सकता है. अपने नायकों का सम्मान हम जीते जी तो नहीं ही करते, मरने के बाद भी उनका सम्मान नहीं करें तो यह और भी शर्मनाक है.


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बिहार के इस महान सपूत के शव के साथ जिस तरह सरकार का रवैया रहा वह शर्मिंदा करने के लिए काफी है. वशिष्ठ नारायण सिंह की महानता का कायल देश और बिहार भले नहीं रहा हो और उन्हें उपेक्षित छोड़ दिया हो लेकिन उनकी महानता का कायल दुनिया था. वे महान गणितज्ञ थे. वशिष्‍ठ नारायण सिंह ने कभी आइंस्टीन के सिद्धांत को चु्नौती दी थी और दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं थीं. वे चालीस साल से मानसिक बीमारी सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित थे. उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज व अस्‍पताल (पीएमसीएच) में दम तोड़ा. उनका अंतिम संस्‍कार राजकीय सम्‍मान के साथ भोजपुर स्थित उनके पैतृक गांव में होगा.

महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह पंचतत्व में विलीन हो गए. राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव बसंतपुर में उनका अंतिम संस्कार किया गया. वशिष्ठ नारायण सिंह के भतीजे मुकेश कुमार ने उन्हें मुखाग्नि दी. हजारों की संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी. गुरुवार को देश के महान गणितिज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन हो गया था. वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन से बिहार समेत पूरे देश में शोक की लहर है. लेकिन उनकी मौत के बाद उनके शव के साथ जिस तरह का क्रूर मजाक किया वह सरकार पर सवाल खड़े करता है.

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के बहाने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला किया और वशिष्ठ बाबू के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस मिलने में हुई देरी पर सूबे के मुखिया नीतीश कुमार को आड़े हाथों लिया. लालू प्रसाद ने ट्वीट कर नीतीश सरकार पर करारा वार किया. अपने ट्वीट में लालू प्रसाद ने लिखा है कि क्या बड़बोली डबल इंजन सरकार उस महान विभूति को एक एंबुलेंस तक प्रदान नहीं कर सकती थी. लालू प्रसाद ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा कि मीडिया में बदनामी होने के बाद क्या किसी के पार्थिव शरीर को सड़क बीच रोककर उसे श्र्द्धांजलि देना एक मुख्यमंत्री को शोभा देता है. क्या अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान मुख्यमंत्री उन्हें कभी देखने गए. बिहार गौरव और हमारी साझी धरोहर महान गणितज्ञ आदरणीय डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह जी के निधन की ख़बर सुनकर बहुत दुःख हुआ. मौत सबको एक न एक दिन आनी ही है लेकिन मरणोपरंत जिस प्रकार उनके पार्थिव शरीर के साथ असंवेदनशील नीतीश सरकार द्वारा जो अमर्यादित सलूक किया गया वह अतिनिंदनीय है.

देश के महान गणितज्ञ वशिष्ठ बाबू अब हमारे बीच नहीं हैं. पीएमसीएच में उन्होंने आखिरी सांस ली. निधन के बाद उनके शव को घर ले जाने के लिए सरकार ने एंबुलेंस तक भी व्यवस्था नहीं कर सकी. कई घंटों तक उनका शव पीएमसीएच में पड़ा रहा. मीडिया में खबर आने के बाद मुख्यमंत्री ने शोक जताया और बिहार के लिए बड़ी क्षति बता दिया. इसके बाद सिस्टम की नींद टूटी तो आनन-फानन में बेशर्म अधिकारी शव को ले जाने की व्यवस्था करने पीएमसीएच पहुंचे. अधिकारी के पीछे-पीछे जेडीयू के कार्यकर्ता भी पीएमसीएच पहुंच गए. उससे पहले पूर्व सांसद पप्पू यादव भी अपने अमला के साथ पहुंच चुके थे. इसके पहले भी बीमारी की अवस्था में पप्पू यादव ने न सिर्फ पीएमसीएच जाकर वशिष्ठ बाबू से मुलाकात की थी बल्कि यथासंभव मदद भी की थी. पप्पू यादव को जैसे हीं खबर मिली वो पीएमसीएच पहुंच वशिष्ठ बाबू के पार्थिव शरीर को ले जाने की व्यवस्था करने लगे. इतने में हीं जेडीयू नेताओं ने पप्पू यादव पर आरोप लगाया कि आप राजनीति मत करिए. फिर क्या था पप्पू यादव जेडीयू नेताओं पर भड़क गए और पूछा कि पिछले तीस सालों से इनको देखने के लिए कौन आया, इनकी इस अवस्था के लिए कौन जिम्मेदार है.

हालांकि मुख्यमंत्री भी वशिष्ठ बाबू के पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि देने उनके आवास पहुंचे. लेकिन बेहद शर्मनाक यह है कि अपने पूरे जीवनकाल में वशिष्ठ बाबू भयंकर त्रास्दी को झेलते रहे. परिजनों के लगातार गुहार लगाने के बाद भी न सरकार और न हीं कोई राजनीतिक दल ने यह प्रयास किया कि उनका बेहतर इलाज हो सके. पूरी जिंदगी बीमारी की अवस्था में गुजारने वाले वशिष्ठ बाबू की मौत के बाद राजनीति का एक और बेशर्म चेहरा समाज के सामने आया है. वशिष्ठ बाबू तो नहीं रहे लेकिन पार्थिव शरीर पर हुई बेशर्म राजनीति ने सरकार का संवेदनहीन चेहरा भी सामने ला दिया. हालांकि महान गणितज्ञ वशिष्ठ बाबू के जीते-जी बेपरवाह रही बिहार सरकार अब निधन के बाद राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्ठि की घोषणा की, इतना हीं नहीं मुख्यमंत्री ने उनके नाम पर इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने का ऐलान कर दिया है. लेकिन पीएमसीएच में स्ट्रेचर पर पड़ा उनका बेजान जिस्म हमारी संवेदनहीनता पर सवाल तो खड़े करता ही है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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