जेएनयू हिंसा में पुलिस ने वामपंथी छात्रों को बताया दोषी

Samachar Jagat | Monday, 13 Jan 2020 05:22:54 AM
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जेएनयू हमले को लेकर दिल्ली पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं. हालांकि उसने दावे कई किए है लेकिन उन दावों के बावजूद उसने परिसर में घुस कर मारपीट करने वाले गुंडों की न तो पहचान की ही और न ही कोई गिरफ्तारी हुई है. लेकिन उसने वामपंथी छात्रों के खिलाफ जरूर कार्रवाई करने में दिलचस्पी ली है. बाकायदा प्रेस कांफ्रेस कर दिल्ली पुलिस ने हमले से पहले मारपीट के मामले में छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष सहित दूसरे वामपंथी छात्रों को आरोपी साबित करने में किसी तरह की कोताही नहीं की. इसे लेकर पुलिस पर सवाल उठे भी.



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पुलिस की फजीहत हुई तो उसने अब दूसरे पक्ष को लेकर भी कुछ तथ्य सामने रखा. जेएनयू हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने 'यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट' नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप की पहचान की है. इस ग्रुप में कुल साठ सदस्य शामिल थे. इस ग्रुप के 37 लोगों की पहचान की जा चुकी है. सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप में करीब दस ऐसे लोग शामिल थे, जो बाहरी हैं. यानी की हिंसा में शामिल यह लोग कैंपस से संबंध नहीं रखते हैं. जांच से सामने आया है कि दोनों ग्रुप यानी लेफ्ट और राइट ने हिंसा में बाहरी लोगों की मदद ली. जेएनयू के छात्रों ने ही बाहरी उपद्रवियों को परिसर में दाखिल करवाया था. अब इस पूरे मामले में जेएनयू का सुरक्षा गार्ड भी शक के घेरे में नजर आ रहा है. वायरल वीडियो में जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आईशी घोष सहित नौ लोगों की पहचान की गई है. इनके खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और फॉरेंसिक तथ्य जुटाए जा रहे हैं. इसके बाद ही पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा.

हालांकि संदिग्धों ने अपनी संलिप्तता से इनकार किया है लेकिन उनका कहना है कि दिल्ली पुलिस का जांच में सहयोग करेंगे. दूसरी तरफ, मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जेएनयू छात्रों के हिंसा में शामिल होने पर नाराजगी जताई और कहा कि दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि जेएनयू के छात्र ही इस पूरे मामले में शामिल हैं, यह जानकर मन व्यथित है. 

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता एमएस रंधावा ने कहा कि जेएनयू हिंसा में गलत सूचना दी जा रही है. ब्रीफिंग का मकसद यही है कि सही तथ्य सामने रखें. मामले की जांच जारी है. डीसीपी (क्राइम ब्रांच) ने कहा कि चार संगठन (एआईएसएफ,आईसा, एसएफआई, डीएसएफ) जेएनयू में चल रहे विंटर सेशन के रजिस्ट्रेशन के खिलाफ थे, लेकिन काफी संख्या में छात्र रजिस्ट्रेशन करना चाह रहे थे, लेकिन ये संगठन, जो छात्र संघ का हिस्सा हैं, रजिस्ट्रेशन नहीं करने दे रहे थे. उनको डरा-धमका रहे थे. तीन जनवरी को इन संगठनों के लोगों ने सर्वर से छेड़छाड़ की. सर्वर को जबरन बंद कर दिया. कर्मियों से धक्का-मुक्की की. इसकी शिकायत जेएनयू प्रशासन ने की थी. बाद में सर्वर री-स्टोर हो गया. पुलिस ने दावा किया कि नौ आरोपियों की पहचान कर ली गई है. इनमें आइशी घोष शामिल हैं.

चार जनवरी को फिर कुछ लोग अंदर घुसे और सर्वर को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया. इसके बाद सारा प्रोसेज रुक गया. इसके बाद अगले दिन रजिस्ट्रेशन करने वाले छात्र के साथ मारपीट की गई. फिर अगले दिन इन्हीं लोगों ने पेरियार हॉस्टल में जाकर मारपीट की, जिसमें छात्रसंघ के लोग भी थे. उसी समय कुछ वाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया. जांच अधिकारी ने कहा, सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल पाए. लेकिन वायरल फोटो और वीडियो से काफी मदद मिली है. यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट नाम के ग्रुप में साठ लोग हैं. कुछ लोगों को चिन्हित किया गया है. इन लोगों को नोटिस जारी किया जा रहा है. उनसे और जानकारी मांगी जाएगी. चार दिन की फैक्ट फाइंडिंग के बाद कुछ नाम सामने आए हैं. 

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने जेएनयू हिंसा पर शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि जेएनयू में वाम मंसूबे अब बेनकाब हो गए हैं. उन्होंने वामदलों पर जेएनयू परिसर को राजनीतिक लड़ाई का मैदान में तब्दील करने का आरोप भी लगाया. पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री ने ट्वीट किया कि जेएनयू में वाम मंसूबे बेनकाब. उन्होंने भीड़ की अराजकता का नेतृत्व किया, कदरताओं के पैसे से खड़ी की गयी सरकारी संपत्ति को नष्ट किया, नए छात्रों को पंजीकरण से रोका और परिसर को राजनीतिक लड़ाई के मैदान के रूप में इस्तेमाल किया. दिल्ली पुलिस के सबूत जारी करने के बाद जेएनयू हिंसा में वामपंथियों का हाथ सबके सामने आ गया है.

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी इस मामले में चुप नहीं रहे. जावेड़कर ने कहा कि हिंसा की दिल्ली पुलिस की जा रही जांच सा साफ हुआ है कि वामपंथी संगठनों से जुड़े छात्र घटना में शामिल थे. विपक्ष पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि भाकपा, माकपा, आप जैसे दलों को लोकसभा चुनाव में खारिज कर दिया गया और अब वे अपने निहित स्वार्थों के लिए छात्रों का उपयोग कर रहे हैं. उन्होंने विश्वविद्यालय के आंदोलनरत छात्रों से अपना आंदोलन समाप्त कर शैक्षणिक सत्र शुरू होने देने की अपील की. जावड़ेकर ने कहा कि पुलिस सच्चाई को सामने लायी और यह स्पष्ट है कि वामपंथी छात्र संगठन हमले में शामिल थे. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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