जीडीपी की धीमी रफ्तार अर्थव्यवस्था की सेहत के लिए ठीक नहीं

Samachar Jagat | Saturday, 30 Nov 2019 11:12:27 AM
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संसद में सब कुछ ठीक है और मंदी जैसी कोई बात नहीं है का दावा करने वाली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन अब अपने दावों से मुकर सकती हैं. क्योंकि आंकड़े सरकार के पक्ष में नहीं है. आंकड़े डराने वाले हैं और सरकार पर सवाल खड़े करने वाले भी. सवाल खड़े भी हो रहे हैं क्योंकि जीडीपी जहां अभी है वह अपने आप में सरकार को कठघरे में खड़ा करता है. भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह तसवीर अच्छी नहीं कही जा सकती. हालांकि इन आंकड़ों को भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर चौंकाने वाला भी माना जा रहा है. इसकी वजह यह है कि किसी ने ऐसे आंकड़े की कल्पना तक नहीं की थी. वाले आंकड़े सामने आए हैं.


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शुक्रवार को सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था में जुलाई से सितंबर के बीच बीते छह सालों में सबसे धीमे स्तर पर बढ़ोतरी हुई. इस दौरान देश की जीडीपी केवल 4.5 फीसद रही जोकि पिछली तिमाही के जीडीपी (5 फीसद) से भी कम है. पिछले साल यानी 2018 में जुलाई-सितंबर के बीच जीडीपी सात फीसद थी. इससे पहले सबसे कम जीडीपी 2013 में जनवरी-मार्च में दर्ज की गई थी. इस दौरान जीडीपी 4.3 फीसद थी. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की जारी जीडीपी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2019-20 की जुलाई-सितंबर के दौरान स्थिर मूल्य (2011-12) पर जीडीपी 35.99 लाख करोड़ रुपए रहा जो पिछले साल इसी अवधि में 34.43 लाख करोड़ रुपए था. इस तरह दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 4.5 फीसद रही.

आलोच्य तिमाही में कृषि, वानिकी और मत्स्यन पालन क्षेत्र में 2.1 फीसद और खनन और उत्खनन में 0.1 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई. विनिर्माण क्षेत्र में इस दौरान एक फीसद की गिरावट रही. इन तीनों समूह के खराब प्रदर्शन के कारण आर्थिक वृद्धि दर कमजोर रही. इसके अलावा बिजली, गैस, जल आपूर्ति और अन्य उपयोग की सेवाओं के क्षेत्र में चालू वित्त वर्ष जुलाई-सितंबर तिमाही में 3.6 फीसद और निर्माण क्षेत्र में 3.3 फीसद वृद्धि रहने का अनुमान लगाया गया है. आलोच्य तिमाही में सकल मूल्य वर्द्धन (जीवीए) 4.3 फीसद रहा. जबकि एक साल पहले 2018-19 की इसी तिमाही में यह 6.9 फीसद थी.

इससे पहले खबर सामने आई थी कि देश में बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योगों का उत्पादन अक्तूबर में 5.8 फीसद घटा है जो आर्थिक नरमी के गहराने की ओर इशारा करता है. इस संबंध में शुक्रवार को सरकार ने आधिकारिक आंकड़े जारी किए. आठ प्रमुख उद्योगों में से छह में अक्तूबर में गिरावट दर्ज की गई. देश में कोयला उत्पादन अक्तूबर में 17.6 फीसद, कच्चा तेल उत्पादन 5.1 और प्राकृतिक गैस का उत्पादन 5.7 फीसद गिरा. 

इस दौरान सीमेंट उत्पादन में 7.7 फीसद, स्टील में 1.6 और बिजली उत्पादन में12.4 फीसद गिरावट दर्ज की गई. समीक्षावधि में सिर्फ उवर्रक क्षेत्र में सालाना आधार पर 11.8 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई. रिफाइनरी उत्पादों की वृद्धि दर घटकर 0.4 फीसद पर आ गई जो पिछले साल इसी माह में 1.3 फीसद थी. अक्तूबर 2018 में बुनियादी क्षेत्र के इन आठ उद्योगों के उत्पादन में 4.8 फीसद की बढ़त देखी गई थी. इस साल अप्रैल- अक्तूबर की अवधि में बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योगों की वृद्धि दर गिरकर 0.2 फीसद रही जो पिछले साल इसी अवधि में 5.4 फीसद थी. पिछले माह सितंबर में बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योगों का उत्पादन सालाना आधार पर 5.1 फीसद गिरा था जो एक दशक का सबसे सुस्त प्रदर्शन था. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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