दिल्ली में आग ने लील ली 43 जिंदगियां, फिर वही सियासत और वैसा ही शोक

Samachar Jagat | Sunday, 08 Dec 2019 08:41:07 PM
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दिल्ली में आग ने 43 जिंदगियों को लील लिया. गलती किसकी थी, कौन जिम्मेदार है. इसे लेकर तरह-तरह की बातें होंगी. सियासत भी हो रही है. लेकिन सियासत का वही रंग दिखाई दे रहा है. सियासत में संवेदना कम, राजनीति के रंग ही ज्यादा हैं. शोक के बहाने एक-दूसरे को निशाना बनाया जा रहा है. लेकिन घटनाएं घटती हैं तभी हम होश में आते हैं. दिल्ली की आग में 43 जानें गंवाने के बाद फिर से वही बातें होने लगीं, जो अक्सर होतीं हैं. किसी की गर्दन तलाशी जा रही है ताकि उसका ठीकरा उस पर फोड़ कर सब कुछ ठीक कर लिया जाए. सियासत का सच तो ऐसा ही है.



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आज सुबह दिल्ली के अनाज मंडी के पास एक फ़ैक्टरी में आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में से ज्यादातर मजदूर थे. मृतकों में बिहार के समस्तीपुर, पूर्णिया और मधुबनी के लोगों की तादाद ज्यादा है. कई लोगों अब भी अस्पताल में भर्ती हैं. दमकल की 25 गाड़ियों ने मौके पर पहुंच पर आग पर काबू पाया और सर्च ऑपरेशन भी खत्म हो गया है. आग एक-दूसरे से जुड़ी तीन इमारतों की चौथी और पांचवी मंजिल में लगी थी. फ़ैक्टरी के मालिक का नाम रेहान है जो सदर बाज़ार इलाके में रहता है. उसे गिरफ़्तार करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है. फिलहाल पुलिस ने फ़ैक्टरी के मालिक के भाई को हिरासत में लिया है. दूसरी तरफ एनडीआरएफ की टीम भी मौक़े पर जांच पड़ताल की है.

छह सौ गज़ में बनी इस इमारत की चारो मंज़िलों पर कपड़े का बैग, प्लास्टिक का काम और बाइंडिंग का काम होता है. घटनास्थल पर पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हादसे पर खेद जताते हुए कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं. साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख रुपए का मुआवज़ा और घायलों के एक-एक लाख रुपए की मदद और मुफ़्त इलाज देने का ऐलान किया. वहीं भाजपा ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 25-25 हज़ार रुपए मदद देने का एलान किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख और गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपए मदद का एलान किया है. 

दिल्ली फायर सर्विस के चीफ अतुल गर्ग ने कहा कि बिल्डिंग को डीएसएफ की ओर से फायर क्लीयरेंस नहीं दिया गया था. उनका कहना है कि इमारत में आग से बचाव के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी तरह के उपकरण नहीं मिले हैं. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा, 'अगर कोई फैक्ट्री किसी घर में अवैध रूप से चल रही थी, तो उसे बंद करने की जिम्मेदारी दिल्ली नगर निगम की थी. एमसीडी ने फैक्ट्री को कैसे चलने दिया. बहरहाल सियासी बोल अब सामने आ रहे हैं. बिहार के सियासी दलों ने भी इस हादसे पर मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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