पूर्व मुख्य न्यायाधीश सहित आठ लोगों ने पत्र लिखा और पूछा-संविधान महज नियमावली है क्या

Samachar Jagat | Tuesday, 14 Jan 2020 08:44:15 PM
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संविधान को लेकर देश भर में टकराव चल रहा है. सरकार पर संविधान से छेड़छाड़ का आरोप लग रहे हैं. सिर्फ विपक्ष ही नहीं सामाजिक संगठनों ने भी सरकार पर हल्ला बोला है. नागरिकता संशोधन कानून के बाद सरकार पर हमले भी बढ़े हैं. भारतीय संविधान के सत्तर साल भी पूरे हो गए हैं. सत्त साल पूरे होने पर देश की जानीमानी हस्तियों ने खुला पत्र लिखा है. इन हस्तियों का ताल्लुक विभिन्न क्षेत्रों से है. विभिन्न क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाली इन हस्तियों ने रविवार को एक पत्र जारी कर सवाल पूछा कि क्या संविधान सिर्फ प्रशासन चलाने की नियमावली है. उन्होंने इस मौके पर लोगों से संविधान के कामकाज का आत्म विश्लेषण करने की भी अपील की. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, भारत के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी सहित आठ लोगों की ओर से ‘भारतीय संविधान के सत्तर साल-महत्त्वपूर्ण क्षण' शीर्षक से एक पत्र जारी किया गया है.



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इस पत्र में भारत के गणतंत्र बनने के सत्तर साल पूरे होने पर खुशी जताते हुए आत्मविश्लेषण करने को भी कहा गया है. साथ ही सवाल किया गया है कि क्या राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के लिए सर्वोपरि सत्य और अहिंसा की विचारधारा आज भी हमारे सार्वजनिक जीवन का मार्ग प्रशस्त कर रही है. पत्र में सभी लोगों ने कहा है कि संविधान के सत्तर साल पूरे होने पर हमें अवसर मिला है कि हम इसकी सफलता पर खुश हो सकें और साथ ही अपनी कमियों का आत्मविश्लेषण कर सकें.

इस पत्र में सभी ने सवाल किया है कि क्या संविधान सिर्फ प्रशासनिक नियमों की एक पुस्तिका है जो निर्वाचित सरकारों को सत्ता का दुरुपयोग करने की वैधता का दावा करने का अधिकार देती है और नागरिकों को दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन करने का पूरा-पूरा हक देती है. उन्होंने सवाल किया कि क्या यह भी किसी स्याही से लिखी कुछ लाइनें हैं या एक पवित्र पुस्तक है जो जाति, धर्म, क्षेत्र जातीयता और भाषा के बंधनों से ऊपर उठकर शहीद हुए लोगों से रक्त से लिखी गई है. पत्र में कहा गया है कि हमारा मानना है कि हर पीढ़ी का कर्तव्य है कि वह लगातार संविधान के कामकाज का अवलोकन करे, उस पर विचार करे और उसपर ध्यान दे.

पत्र में लोगों से अपील की गई है कि इस अवसर पर हमें अपनी सफलता पर खुश होना चाहिए, मौजूदा चिंताओं को दूर करना चाहिए, बहुलतावादी, धर्मनिरपेक्ष समाज के हित में काम करना चाहिए और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर और पूर्वजों के प्रस्तावना में रखे विचारों/सपनों के संवैधानिक लक्ष्यों को पाने का प्रयास करना चाहिए.

भारतीय संविधान के सत्तर साल पूरे होने पर जारी इस पत्र पर सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग, प्रसिद्ध फिल्मकार अदूर गोपालकृष्णन, अभिनेत्री व सेंसर बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष शर्मिला टैगोर, कर्नाटक संगीत की जानी-मानी हस्ती टीएम कृष्णा, यूजीसी और आईसीएसएसआर के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव थोराट और योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयदा हमीद ने भी हस्ताक्षर किया है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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