बाबरी मस्जिद के नीचे मौजूद है विशाल मंदिरनुमा ढांचा: सीएस वैद्यनाथन

Samachar Jagat | Friday, 04 Oct 2019 10:42:58 AM
A huge temple structure exists under the Babri Masjid: CS Vaidyanathan

इंटरनेट डेस्क। अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष ने स्कंद पुराण का हवाला देकर कहा कि राम जन्मस्थान के दर्शन से मोक्ष मिलता है। रामलला के वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा कि स्कंद पुराण बाबर के भारत आने और वहां मस्जिद बनने से बहुत पहले का है जो उस स्थान की महत्ता साबित करता है। इसके अलावा हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचे के नीचे मिले खंडहरों के निर्माण में चूना सुर्खी के प्रयोग को इस्लामिक काल का बताए जाने की मुस्लिम पक्ष की दलील का विरोध करते हुए कहा कि भारत में चूना सुर्खी का प्रयोग इस्लाम के आने से पहले से होता रहा है।


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भगवान रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन और पीएस नरसिम्हा ने बहस की। उन्होंने मुस्लिम पक्ष द्वारा एएसआइै रिपोर्ट पर उठाई गई आपत्तियों और राम जन्मस्थान का महत्व व हिंदुओं की उसके प्रति आस्था को साबित करने का प्रयास किया। इसके अलावा पूजा अर्चना का अधिकार मांग रहे गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने रामलला के मुकदमे का समर्थन करते हुए कहा कि आठ से 16 फरवरी 1950 के बीच कई मुसलमानों ने सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष हलफनामा दाखिल कर कहा था कि जन्मस्थान तोड़कर वहां बाबरी मस्जिद बनाई गई थी। निर्मोही अखाड़ा की ओर से एसके जैन ने सेवादार होने का दावा करते हुए उन्हें सेवादारी और कब्जा सौंपे जाने की मांग की।

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श्रीराम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से पीएन मिश्रा और रंजना अग्निहोत्री ने अयोध्या जन्मस्थान भूमि को स्वयं देवता होना साबित करने के लिए स्कंद पुराण के हवाले से राम सेतु का जिक्र किया, जिसे स्कंद पुराण में देवता कहा गया है। मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें नई दलीलें पेश करने से रोका, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और मिश्रा से कहा कि जो चीजें हाई कोर्ट में नहीं कही थीं, उन्हें यहां न रखें। पीएस नरसिम्हा ने कहा कि दस्तावेजी साक्ष्यों को भी दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि राम जन्मस्थान का दर्शन करने से मोक्ष मिलता है। स्कंद पुराण में राम जन्म का निश्चित स्थान भी बताया गया है। उन्होंने कहा कि स्कंद पुराण 7वीं-8वीं सदी में लिखा गया था, जो कि 1528 में मस्जिद बनने से बहुत पहले का काल था। कोर्ट को मस्जिद बनने से पहले और बाद दोनों के काल पर विचार करना चाहिए।
 



 

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