अब भारतवंशी की छिन सकती है अमेरिकी नागरिकता

Samachar Jagat | Wednesday, 04 Jul 2018 05:52:18 PM
American citizenship can now be stripped of bharatavanshee

वाशिंगटन। अमेरिका ने आतंकवाद के दोषी पाए गए एक भारतवंशी की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने को लेकर इलिनोइस जिले की एक संघीय अदालत में वाद दायर किया है।

अहमद ने 2009 में इराक या अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य बलों को निशाना बनाने के मकसद से विदेश जाने के अपने प्रयासों के जरिए आतंकवादियों को मदद मुहैया कराने के आरोपों को स्वीकार किया था।

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उसे 2010 में आठ साल और चार महीने की कैद की सजा सुनाई गई थी और सजा पूरी होने पर रिहाई के बाद भी उस पर तीन साल तक नजर रखने को कहा गया था।  

कार्यवाहक एसोसिएट अटॉर्नी जनरल जेसी पानुसियो ने अहमद की नागरिकता वापस लिए जाने के लिए इलिनोइस की एक संघीय अदालत में वाद दर्ज कराने के बाद कहा है कि नागरिकता रद्द करना हमारे आतंकवाद रोधी प्रयासों का एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

हम इसी सरगर्मी से अहमद जैसे व्यक्तियों की तलाश करना और उन पर अभियोग चलाना जारी रखेंगे। अहमद ने 2004 में अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी।

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अहमद के खिलाफ दर्ज शिकायत में उस पर आरोप है कि नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान उसने अपने आपराधिक आचरण के बारे में गोपनीयता बनाए रखी।

साथ ही कहा गया कि अगर आव्रजन अधिकारियों को आतंकवाद सम्बंधी गतिविधियों की जरा भी भनक होती तो उसका आवेदन रद्द हो जाता।  

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स्पेशल एजेंट इन चार्ज जेम्स गिबन्स ने कहा कि अमेरिका कभी भी आतंकवादियों का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं हो सकता।  

उन्होंने कहा कि जब आव्रजन का लाभ लेने के लिए कोई झूठ बोलता है तो व्यवस्था बुरी तरह कमजोर हो जाती है और हमारे राष्ट्र की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

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खलील अहमद का दोषी पाया जाना और उसके जिस आचरण को इसका आधार बनाया गया उस हिसाब से कई आधारों पर उसकी नागरिकता रद्द करना जरूरी है।

 खलील अहमद और उसके रिश्तेदार जुबैर अहमद ने 2004 से 2007 के बीच विदेश यात्रा की तैयारियां की और उन गतिविधियों में लिप्त होने के इरादों के साथ मिस्र का दौरा भी किया। इससे अमेरिकी सुरक्षा बलों के कर्मियों की हत्या की जा सके या उन्हें अपंग किया जा सके। 
 



 

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