डिफेंस कॉरिडोर में निवेश के लिये आकर्षक नीति की जरूरत : योगी

Samachar Jagat | Friday, 16 Aug 2019 10:39:11 AM
An attractive policy is needed to invest in the defense corridor: Yogi

लखनऊ। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के निर्माण के लिये संजीदा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अधिकारियों से पूंजी निवेश और निवेशकों के लिये आकर्षक रणनीति एवं पॉलिसी बनाए जाने को कहा।


रूस की तीन दिवसीय यात्रा से वापस आने के बाद अपने सरकारी आवास पर अधिकारियों के साथ एक बैठक में योगी ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में निवेश के इच्छुक उद्यमियों एवं निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर है। डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर के प्रथम चरण में 500 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य है। इसके लिये लैण्ड बैंक की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होने कहा कि कॉरीडोर के सम्बन्ध में कार्य योजना बनाते हुए कई समिट कराए जाने की जरूरत है। यह समिट कानपुर, चित्रकूट, आगरा, अलीगढ़, लखनऊ, झांसी आदि में आयोजित कराए जा सकते हैं।

रूस मे निवेश की संभावनाओं का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा कि सुदूर पूर्व रूस में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण एवं ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और व्यापार की व्यापक सम्भावनाओं को देखते हुए भविष्य की रणनीति तैयार की जानी चाहिए। वहां पर कृषि, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, डेयरी, पशुधन एवं इससे जुड़े क्षेत्रों के विकास की सम्भावनाओं के मद्देनजर उत्तर प्रदेश और उद्यमियों के लिए निवेश के बेहतर अवसर मौजूद हैं। 

उन्होने कहा कि रूस में निवेश के साथ-साथ रोजगार के भी कई अवसर उपलब्ध हैं। उनका उपयोग कर हम रूस-भारत के परस्पर सहयोग और विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। यूपीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने मुख्यमंत्री को डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर की प्रगति से अवगत कराते हुए कहा कि 1000 हेक्टेयर भूमि की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है। लैण्ड बैंक के लिए तेजी से कार्यवाही की जा रही है। इस कॉरीडोर के लिए भूमि की कमी नहीं होने दी जाएगी। साथ ही, आधारभूत आवश्यकताओं को भी पूरा किए जाने की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

योगी ने अधिकारियों को हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मध्य राजस्व से जुड़े मामलों पर भी कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि यमुना नदी को चैनलाइज करते हुए उसकी ड्रेजिंग होने से भूमि सम्बन्धी मामलों का समाधान निकाला जा सकता है। इसके बाद दोनों प्रदेशों के प्रमुख सचिव और उसके उपरान्त मुख्य सचिव के स्तर पर एक बैठक कर ली जाए। -(एजेंसी)



 

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