समलैंगिकों को अधिकार दिलाने के लिए इस वकील ने गुजार दिए अपनी जिदंगी के बीस वर्ष, आखिरकार मिली जीत  

Samachar Jagat | Saturday, 08 Sep 2018 12:31:31 PM
anand grover fought a long fight for lgbt community

भले ही सम​लैंगिक अधिकार कानून पारित हो गया, लेकिन इस कानून को पास करवाने ​के लिए जिस वकील ने जी-तोड मेहनत की है। वो ही जानता हैं उन्हे किन-किन दलीलों से गुजरना पडा होगा। उन्होंने लगातार बीस वर्ष तक समलैंगिकों के अधिकार के खिलाफ कोर्ट में लडाई जारी रखी।

आखिरकार समलैंगिकों का न्याय मिल ही गया। कोर्ट ने 7 सितंबर को अपना फैसला सुनाते हुए इस मामले का सही ठहराया। साथ ही कहा कि ये कोई अपराध की श्रेणी में नहीं है। आपको बता दें कि धारा 377 को खत्म करने के उच्चतम न्यायालय के ऐतेहासिक फैसले से LGBT समुदाय में ख़ुशी की लहर छाई है। देशभर में LGBT समुदाय ने इस फैसले के बाद जश्न मनाया।

अब उन्हें कोई भी अपराधी नहीं कहेगा। लेकिन इस बड़ी जीत के पीछे उस व्यक्ति का सबसे अधिक योगदान है जिसने अपने जीवन के 20 वर्ष इस इंसाफ की लड़ाई के लिए कुर्बान कर दिए। धारा 377 को लेकर एक NGO यानी गैर सरकारी संगठन नाज़ फाउंडेशन ने समलैंगिकों के अधिकारों के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी तथा नाज़ फाउंडेशन का केस लड़ने वाले वकील का नाम आनंद ग्रोवर है।

नाज़ फाउंडेशन ही वो संगठन है जिसने साल 2013 में समलैंगिकता को अपराध घोषित करने के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इस लड़ाई की शुरुआत 1998 में हुई। उन दिनों के अपने अनुभवों को साझा करते हुए ग्रोवर ने कहा कि उन दिनों हम लोग एचआईवी पर बहुत सारा काम कर रहे थे।

हम इस बात के लिए लड़ रहे थे कि किसी भी एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति से नौकरी के दौरान कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। एचआईवी 'समलैंगिक यौन संबंध' से जुड़ा हुआ था ऐसे में हमारे पास 'गे सेक्स' के कई लोगों ने संपर्क करना शुरू कर दिया। इस लड़ाई में आने वाली परेशानियों को साझा करते हुए ग्रोवर ने कहा कि कई तरह के मामले सामने आए।

पुलिस इस तरह के लोगों से ब्लैकमेल करती थी। समलैंगिक पुरुषों को ठीक करने के लिए इलेक्ट्रिक थेरेपी का सहारा लिया जाता था। हम ये जानना चाहते थे कि ये सब क्यों हो रहा था और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि धारा 377 ही इसकी जड़ है। हमें पता चला कि दिल्ली में नाज़ फाउंडेशन भी इस पर काम कर रहा था। इसलिए हमने 2001 में नाज़ फाउंडेशन की तरफ से याचिका दायर की थी।



 

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