खुले भगवान बद्रीनाथ के कपाट, बद्री विशाल के जयकारों से बना पूरा वातावरण भक्तिमय

Samachar Jagat | Friday, 10 May 2019 04:22:32 PM
Badrinath yatra 2019

बद्रीनाथ। उत्तराखंड में उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में स्थिति भगवान बद्रीनाथ के कपाट छह माह के शीतकालीन अवकाश के बाद शुक्रवार को पुन: श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। चमोली जिले में स्थिति  भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ धाम के कपाट ब्रह्म मुहूर्त में मेष लग्न और पुनर्वसु नक्षत्र में तड़के 4:15 मिनट पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए।

अब ग्रीष्मकाल में छह माह तक भगवान बद्रीनाथ की पूजा-अर्चना बद्रीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी संभालेंगे। बद्रीनाथ के साथ ही अब गढ़वाल हिमालय के चार धामों के नाम से मशहूर सभी धामों के कपाट खुल चुके हैं। कल केदारनाथ के कपाट खुले थे जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के पट अक्षय तृतीया पर सात मई को खोले गए थे। 

चलो भोले बाबा के द्वारे...! बाबा केदारनाथ के खुले कपाट,गूंजे बम-बम भोले के जयकारे

सुहावने मौसम के बीच कपाट खुलने के अवसर पर भगवान बद्रीनाथ और अखंड ज्योति के दर्शनों को मंदिर परिसर सुबह में करीब पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री मौजूद थे। तीर्थयात्रियों के जयकारों से बद्रीशपुरी गुंजायमान रही। पहले दनि अखंड ज्योति के दर्शन के लिए तीर्थयात्रियों के पहुंचने का सिलसिला पूरे दनि चलता रहा।

इस दौरान परंपरागत वाद्य यंत्रों के साथ सेना के बैंड की मधुर धुनों और श्रद्धालुओं के बद्री विशाल के उद्घोषों ने पूरा वातावरण भक्तिमय बनाए रखा। इससे पहले, बद्रीनाथ धाम में कल देर रात से ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने लाइन लगानी शुरू कर दी थी। पहले ही दिन भगवान बद्रीनाथ के दर्शन करने वालों में उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक भी मौजूद रहे।

हर साल अप्रैल-मई में शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के शुरू होने का स्थानीय जनता को भी इंतजार रहता है। छह माह तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु और पर्यटक जनता के रोजगार और आजीविका का साधन हैं और इसलिए चारधाम यात्रा को गढ़वाल हिमालय  की आर्थिक की रीढ़ माना जाता है। चारों धामों के सर्दियों में भारी बर्फबारी और भीषण ठंड की चपेट में  रहने की वजह से उनके कपाट हर साल अक्टूबर-नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं जो अगले साल अप्रैल-मई में फिर खेल दिए जाते हैं।



 

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