भोपाल गैस त्रासदी: दर्द से चिखते और तडपते लोग, 34 साल बाद भी नहीं लगा कोई मरहम

Samachar Jagat | Monday, 03 Dec 2018 09:52:33 AM
Bhopal gas tragedy

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भोपाल। दर्द से चिखते और तडपते लोग, भंयकर गैस त्रासदी का नाम आज भी जुंबा पर आ जाता है तो रूहं कांप जाती है, ऐसी थी भोपाल गैस त्रासदी। आपको बता दें कि 2 और 3 दिसंबर को की रात्रि भोपाल में मानव इतिहास की एक सबसे भयंकर औद्योगिक रिसाव की घटना हुई। जहरीली गैस के इस खौफनाक रिसाव में हजारों जानें चली गईं।


इस तबाही का अंत यहीं नहीं हुआ बल्कि आज तक इसका विनाशक असर पड़ रहा है। भोपाल गैस त्रासदी की इस घटना का नाम सुनते ही आज भी लोग सहम जाते हैं। आज उस त्रासदी को पूरे 34 वर्ष हो गए है, लेकिन नाम जुबां पर आते ही रूहं कांप जाती है।इतने वर्ष के बाद भी सरकार पीड़ितों के दर्द पर मरहम नहीं लगाई है। पीड़ित मुआवजे समेत बुनियादी सुविधाओं के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

फिर दिखा सरकार के प्रति गुस्सा
भोपाल की सड़कों पर रविवार को यूनियन काबार्इड गैस पीड़ितों ने एक बार फिर सरकारों के खिलाफ गुस्सा दिखाया। कई स्थानों पर मशाल जुलूस निकाले गए। हाथ में मशाल थामे लोग 34 वर्ष गैस हादसे को याद कर सरकारों पर बरस रहे थे और नारे लगा रहे थे कि अब और भोपाल नहीं बनने देंगे।

मध्य प्रदेश की राजधानी में रविवार शाम कई स्थानों पर मशालें जलाकर लोगों ने अपना संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया। साथ ही अपने बिछुड़े प्रियजनों को श्रद्धांजलि दी। भोपाल में दो-तीन दिसंबर, 1984 की दरम्यानी रात को यूनियन काबार्इड प्लांट से रिसी जहरीली गैस ने हजारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया था।

तभी से विभिन्न संगठन पीड़ितों के हक व न्याय के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं। उस रात भोपाल स्थित कारखाने से रिसी जहरीली गैस मिक (मिथाइल आइसोसाइनाइट) से अब तक 20,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और लगभग 5.74 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

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