आखिर कौन हैं चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की मौत का जिम्मेदार, सरकार खामोश!

Samachar Jagat | Thursday, 20 Jun 2019 01:54:50 PM
bihar chamki fever

बिहार/जयपुर। चमकी बुखार में मरने वाले बच्चों की मौत की खबरें हर अखबार की सुर्खियां बनी हुई है, लेकिन अब मन में बस यह सवाल उठने लगा है कि इतने बच्चों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है?लेकिन इसकी जिम्मेदारी लेने से हर कोई बचता हुआ नजर आ रहा है।

जैसे-जैसे वक्त निकल रहा है बिहार में 'चमकी' बुखार बच्चों की जिंदगियां निगलता जा रहा है। बिहार में इंसेफलाइटिस बुखार से पीड़ित बच्चों के दम तोड़ने की संख्या बढती हुई नजर आ रही है। मरने वाले बच्चों की संख्या 135 तक पहुंच गई। पूरे मामले में सरकार खामोश है। सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही 117 बच्चों की मौत हो गई।

राज्य सरकार और केन्द्र सरकार की तैयारियां की खुली पोल
इस बीच, इस बुखार से निपटने की राज्य एवं केंद्र सरकार की तैयारियों की पोल भी खुल गई है। शुरुआत में बच्चों की मौत पर राज्य का स्वास्थ्य मंत्रालय लापरवाह और असंवेदनशील बना रहा लेकिन मीडिया में मामला तूल पकड़ने के बाद नीतीश सरकार हरकत में आई और मुजफ्फरपुर चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाना शुरू किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से लेकर सीएम नीतीश कुमार तक यहां दौरा कर चुके हैं लेकिन हालात अब भी काबू में नहीं है। इस बीच सूबे के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक प्रेस वार्ता में इस मुद्दे पर जवाब देने से सीधे मुकर गए। सुशील मोदी ने दो टूक कहा कि यह पत्रकार सम्मेलन बैंकिंग समितियों के बारे में है। इससे जुड़ा सवाल पूछेंगे तभी जवाब मिलेगा। 

आपको बता दें कि इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन बिहार हाल को लेकर मीडिया के सवालों को टालते नजर आए। संसद में बजट सत्र के बाद जब मीडिया ने उनसे बिहार के हालातों पर सवाल करने शुरू किए तो उन्होंने सीधा कह दिया कि वे यहां प्रेस कॉंफ्रेंस नहीं कर रहे हैं।

हर्षवर्धन ने कहा कि उनको इस बारे में जो कहना था, वे कह चुके। हैरान करने वाली बात है कि केंद्र अथवा नीतीश कुमार सरकार का कोई भी मंत्री या नेता इंसेफलाइिटस से बच्चों की हो रही मौतों पर अपनी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है।

क्या लीची खाने से हुई बच्चों की मौत?
मुजफ्फरपुर जिला अस्पताल को शुरू में पता ही नहीं चला कि बच्चों की मौत इंसेफलाइटिस यानि 'चमकी' बुखार से हो रही है। शुरू में चिकित्सकों ने कहा कि बच्चों की मौतें ज्यादा गर्मी से हो रही हैं फिर बाद में इसे लीची खाने से जोड़ दिया।

डॉक्टर वक्त रहते बीमारी का पता नहीं लगा सके और उपचार भी अनुमान पर करते रहे। वहीं, 'चमकी' बुखार से पीड़ित बच्चे हर पल जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। परिजन अपने बच्चों की हालत को लेकर परेशान हैं लेकिन ऐसा लगता है कि सरकारों को उनके दर्द की चिंता नहीं है, वे अपने लाल फीताशाही वाले अंदाज में काम कर रही है। नीतीश सरकार ने मृतक बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए की मुआवजे की घोषणा की है। यह बात अलग है कि सरकार के वादे और दावे के बाद भी मौतों का सिलसिला रुक नहीं रहा है।

ये है चमकी बुखार के लक्षण
यह एक संक्रामक रोग है। इस बीमारी के वायरस शरीर में पहुंचते ही खून में शामिल होकर अपना प्रजनन शुरू कर देते हैं। शरीर में इस वायरस की संख्या बढ़ने पर यह खून के साथ मिलकर व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। मस्तिष्क में पहुंचने पर यह वायरस कोशिकाओं में सूजन पैदा कर देते हैं, जिसके कारण से शरीर का सेंट्रल नर्वस सिस्टम खराब हो जाता है।

चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज बुखार चढ़ा रहता है। शरीर में ऐंठन के साथ बच्चा अपने दांत पर दांत चढ़ाए रहता हैं। शरीर में कमजोरी के कारण से बच्चा बार-बार बेहोश होता रहता है। शरीर में कंपन के साथ बार-बार झटके लगते रहते हैं। यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है।



 

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