बिहार आश्रय गृह कांड: कोर्ट ने देश में दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की

Samachar Jagat | Tuesday, 07 Aug 2018 02:38:34 PM
Bihar shelter home scandal: Court expresses concern over rising incidents of crime in  country

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश मे बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर मंगलवार को गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि जिधर देखो, उधर ही, महिलाओं का बलात्कार हो रहा है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति  दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रय गृह का संचालन करने वाले गैर सरकारी संगठन को वित्तीय सहायता देने पर बिहार सरकार को आड़े हाथ लिया।

इस आश्रय गृह की लड़कियों से कथित रूप से बलात्कार और उनके यौन शोषण की घटनाएं हुई हैं। पीठ ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में हर 6 घंटे में एक महिला बलात्कार की शिकार हो रही है।

ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में भारत में 38,947 महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ। इस स्थिति पर नाराजगी और चिंता वयक्त करते हुए पीठ ने कहा कि इसमें क्या करना होगा? लड़कियां और महिलाएं हर तरफ बलात्कार की शिकार हो रही हैं।

इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त वकील अपर्णा भट ने पीठ को सूचित किया कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में यौन उत्पीडऩ की कथित पीडि़तों को अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस आश्रय गृह में बलात्कार का शिकार हुई लड़कियों में से एक अभी भी लापता है।

इस आश्रय गृह का निरीक्षण करने वाले टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज ने न्यायालय को बताया कि बिहार में इस तरह की 110 संस्थाओं में से 15 संस्थाओं के प्रति गंभीर चिंता व्यक्त की गई हैं। इस पर बिहार सरकार ने न्यायालय से कहा कि विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित इन 15 संस्थानों से संबंधित यौन उत्पीडऩ के नौ मामले दर्ज किए गए हैं।

इससे पहले, शीर्ष कोर्ट ने दुष्कर्म और यौन हिंसा की शिकार इन पीडि़ताओं के चेहरे ढकने के बाद भी उन्हें दिखाने से इलेक्ट्रानिक मीडिया को रोक दिया था। पीठ ने साफ शब्दों में कहा था कि उसने पुलिस को जांच करने से नही रोका है और यदि वह कथित पीडि़तों से सवाल जवाब करना चाहें तो उन्हें इसके लिए बाल मनोविशेषज्ञों की सहायता से ऐसा करना होगा।

राज्य सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त गैर सरकारी संगठन का मुखिया बृजेश ठाकुर इस आश्रय गृह का संचालन करता था। इस आश्रय गृह में 30 से अधिक लड़कियों के साथ कथित रूप से बलात्कार और उनका यौन शोषण किए जाने के आरोप हैं। इस मामले में ठाकुर सहित 11 व्यक्तियों के खिलाफ 31 मई को प्राथमिकी दर्ज हुई थी और बाद में यह मामला केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया था।



 

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