बुलंदशहर हिंसा : बजरंग दल का फरार कार्यकर्ता वीडियो में सामने आया, बेकसूर बताया

Samachar Jagat | Thursday, 06 Dec 2018 09:16:44 AM
Bulandshahr Violence: Bajarang Dal absconding activist appeared in video

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बुलंदशहर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोकशी को लेकर भीड़ की हिंसा के बाद फरार हुआ बजरंग दल का एक नेता बुधवार को एक वीडियो क्लिप में नजर आया, जिसमें उसने निर्दोष होने का दावा किया। इस हिंसा में एक पुलिस इंस्पेक्टर और एक युवक मारा गया था।


दक्षिणपंथी संगठन की पश्चिमी उत्तर प्रदेश ईकाई ने यह भी दावा किया कि उसका बुलंदशहर संयोजक योगेश राज हिसा में शामिल नहीं था लेकिन साथ ही उसने कहा कि उसे आत्मसमर्पण कर देना चाहिए।
बजरंग दल ने सुझाव दिया कि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो करे ना कि राज्य पुलिस।

सोमवार को हुई हिंसा के बाद 4 लोगों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस ने शाम तक किसी और के गिरफ्तार होने की सूचना नहीं दी। उत्तर प्रदेश पुलिस प्रमुख ओपी सिंह ने कहा कि इस हिसा के पीछे साजिश की बू आ रही है। सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया कि पुलिस ने वक्त पर संभाल लिया नहीं तो हालात और खराब हो सकते थे।

वहां से 40 किलोमीटर दूर मुसलमानों का 3 दिवसीय तब्लीगी इज्तिमा चल रहा था जिसमें लाखों की संख्या में दूर दराज से आये मुसलमान शामिल थे। बुलंदशहर की स्याना तहसील के चिगरावठी, महाव और नया बांस गांवों में बुधवार को तनाव व्याप्त रहा लेकिन सुरक्षा थोड़ी कम कर दी गई थी।

पुलिस द्बारा दो प्राथमिकियां दर्ज करने के संबंध में गिरफ्तारी के डर से कई लोग अपने घर छोड़कर चले गए हैं। पुलिस ने एक प्राथमिकी कथित गोकशी पर और दूसरी हिसा के लिए दर्ज की है। इलाके में स्कूलों में कोई कक्षा नहीं लगी।

यहां भीड़ ने एक खेत में पशुओं के शव मिलने के बाद सोमवार को एक पुलिस चौकी फूंक दी थी और पुलिसकर्मियों पर हमला किया था। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और 20 वर्षीय सुमित कुमार की हमले में गोली लगने से मौत हो गई। इंस्पेक्टर सिंह ने दादरी में 2015 में मोहम्मद अखलाक की पीट पीटकर हत्या मामले की शुरुआत में जांच की थी।

लखनऊ में अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार, छह दिसंबर को लखनऊ में 5 कालीदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर दिवंगत इंस्पेक्टर सिह के परिजनों से मुलाकात करेंगे। बजरंग दल के पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह संयोजक प्रवीण भाटी ने दावा किया कि योगेश राज का हिसा से कोई लेना देना नहीं है।

भाटी ने कहा कि वे पुलिस के साथ सहयोग करेगा और सही समय पर सामने आएगा। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर उसे आत्मसमर्पण करना चाहिए लेकिन मैं भी यह स्पष्ट कर दूं कि सच सामने लाने के लिए किसी बड़ी एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।

वीडियो में खुद को योगेश राज बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि जब उसने महाव गांव में गोकशी के बारे में सुना तो वह अपने समर्थकों के साथ गया। उसने वीडियो में कहा है, सोमवार को महाव गांव में गोकशी होने की सूचना मिलने पर मैं अपने साथियों के साथ पहुंचा।

पुलिस भी वहां पहुंची। बाद में हम लोग स्याना थाने में शिकायत दर्ज कराने आए। कथित वीडियो में योगेश ने दावा किया है कि जब वे लोग शिकायत दर्ज करा रहे थे, उसी समय उन्हें पथराव और गोलीबारी होने की खबर मिली। इलाके में घटनास्थल के आसपास तैनात किए गए उत्तर प्रदेश पीएसी और राज्य त्वरित कार्रवाई बल को हटा लिया गया है।

हालांकि चिगरावठी पुलिस चौकी के आसपास और बुलंदशहर-गढ़मुक्तेश्वर राजमार्ग पर बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश पुलिसकर्मी तैनात हैं। चिगरावठी गांव के प्रमुख अजय कुमार ने पीटीआई-भाषा से कहा कि हां सुरक्षा कम कर दी गई है लेकिन लोग अब भी डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि मामले में अपना नाम खींचे जाने के डर से कई लोग गांव से चले गये हैं।

प्राथमिकी में 50 से 60 अज्ञात लोगों के नाम हैं और यहां लोगों की चिता की वजह यही है। बुधवार को गांव के बाहर सरकारी प्राथमिक और निम्न माध्यमिक स्कूलों में कोई बच्चा पढ़ने नहीं आया। महाव गांव के पूर्व प्रधान और प्राथमिकी में बतौर आरोपी नामजद 27 लोगों में से एक राजकुमार चौधरी की पत्नी और एक रिश्तेदार ने पुलिस पर तोड़फोड़ करने और हमला करने का आरोप लगाया।

पशु के अवशेष उनके खेत में पाए गए थे और वह तथा गांव के कुछ अन्य लोग फरार हैं। ग्रामीणों ने दावा किया कि बजरंग दल के लोग बाहर से घटनास्थल पर आए थे और उन्होंने पशु के अवशेषों को पुलिस चौकी ले जाने पर जोर दिया था लेकिन पुलिस ही उनके गांव में आ गई थी। चौधरी की एक रिश्तेदार बीना देवी ने कहा कि चार दिसंबर को तड़के करीब एक बजे 14-15 पुलिसकर्मी जबरन हमारे घर में घुसे और हर चीज तहस-नहस कर दी।

उनके साथ कोई महिला पुलिस अधिकारी नहीं थी। उसकी पत्नी प्रीति ने दावा किया कि पुलिस ने उनकी कार क्षतिग्रस्त कर दी, मकान की खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए और उस पर हमला किया। उसने दावा करते हुए कहा कि काले रंग की जैकेट पहने एक पुलिसकर्मी ने मुझसे बदतमीजी की।

उनमें से एक ने डंडे से मेरे दाएं पैर पर मारा और उस हिस्से की त्वचा काली पड़ गई। प्राथमिकी में जितेंद्र मलिक नाम का व्यक्ति भी नामजद है। उसकी 24 वर्षीय पत्नी प्रियंका ने भी पुलिस पर हमला करने का आरोप लगाया।

उसने मेरठ में एक अस्पताल से फोन पर पीटीआई-भाषा से कहा कि मैं अपने ससुर और तीन महीने के बच्चे के साथ घर पर थी जब पुलिस हमारे घर में घुसी। उन्होंने मेरे साथ मारपीट की जिससे मेरे हाथ में फ्रैक्चर हो गया और एक कान भी बुरी तरह चोटिल हुआ।

प्राथमिकी के अनुसार, गोकशी मामले के सात आरोपी नया बांस गांव में रहते है। वहां के लोगों ने कहा कि गांव में तनाव व्याप्त है। मामले में आरोपी बनाए गए दो लोग नाबालिग हैं। उनकी आयु 11 और 12 वर्ष है। उनका प्राथमिकी में गलत तरीके से नाम दर्ज किए जाने का आरोप है। 

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