चंद्रयान -2:  सॉफ्ट लैंडिंग की केवल 52 फीसदी कोशिशें ही सफल

Samachar Jagat | Saturday, 07 Sep 2019 09:59:06 AM
Chandrayaan-2: Only 52% of soft landing attempts succeed I

इंटरनेट डेस्क। भारत ने शनिवार को अंतरिक्ष विज्ञान में इतिहास रचने के करीब था। चांद के दक्षिणी ध्रुवत  पर लैंडर विक्रम के उतरने की सारी प्रक्रिया भी सामान्य रूप से चल रही थी। कुल 13 मिनट 48 सेकंड तक सब कुछ बिल्कुल सटीक और सही सलामत चला।


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नियंत्रण कक्ष में वैज्ञानिक उत्साहित थे। लेकिन आखिरी के डेढ़ मिनट पहले जब लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर ऊपर था। रात लगभग 1 बजकर 55 मिनट पर उसका इसरो के नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया। ऐसा नहीं कि केवल भारत को ही सॉफ्ट लैंडिंग कराने में मायूसी हाथ लगी है। इससे पहले इन देशों के प्रयास भी विफल रहे हैं।

अभी तक चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के कुल 38 कोशिशें की गई हैं। इनमें से महज 52 फीसदी प्रयास ही सफल रहे हैं। चंद्रमा पर दुनिया के केवल छह देशों या एजेंसियों ने अपने यान भेजे हैं लेकिन कामयाबी केवल तीन को मिल पाई है। चंद्रमा की सतह पर उतरने की पहली कोशिश साल 1959 में अमेरिका और सोवियत रूस द्वारा की गई थी। वर्ष 1958 में ही अगस्त से दिसंबर 1968 के बीच दोनों देशों ने आपधापी में कुल सात लैंडर भेजे। लेकिन इनमें से कोई भी सॉफ्ट लैंडिंग में सफल नहीं हो सका था। अमेरिका ने चार पायनियर ऑर्बिटर जबकि सोवियन संघ की ओर से तीन लूनर इंपैक्ट को भेजा गया था।

सोवियत संघ ने 1959 से 1976 के बीच लूना प्रोग्राम के तहत कुल 13 कोशिशें की थी। चंद्रयान-2 चंद्रमा पर दुनिया का 110 वां और इस दशक का 11वां अंतरिक्ष अभियान है। 109 में से 90 अभियानों को 1958 और 1976 के बीच चांद पर भेजा गया। उसके बाद चांद पर अभियानों को भेजने का सिलसिला सुस्त पड़ गया। 20वीं सदी नौवें दशक में चंद्रमा पर अभियान धीरे-धीरे फिर से शुरू हो गए और 2008 में चंद्रयान -1 द्वारा चंद्रमा पर की गई पानी की खोज ने दुनिया का ध्यान चंद्रमा की ओर फिर आकर्षित किया।

चंद्रयान -2 चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग का भारत का पहला प्रयास है। भारत के पड़ोसी चीन का पहला मून लैंडर चांग ई-3 था, जिसे चीन की अंतरिक्ष एजेंसी ने 1 दिसंबर 2013 को सफलतापूर्वक लांच किया था। इसके बाद चीन ने फरि चांग ई-4 की सफल लॉन्चिंग के जरिए चांद के सुदूर हिस्से में उतारने वाला पहला देश बना था।
 



 

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