न्यायालय ने तीन तलाक को चुनौती देने वाली नयी याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

Samachar Jagat | Wednesday, 13 Nov 2019 02:54:56 PM
Court seeks response from Center on new petition challenging triple talaq

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने तीन बार तलाक कह कर संबंध विच्छेद करने को दंडनीय अपराध बनाने के कानून की वैधानिकता को चुनौती देने वाली ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की याचिका पर केंद्र से बुधवार को जवाब मांगा। न्यायमूर्ति एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की याचिका मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दी।

यह अधिनियम तलाक ए बिद्दत और मुस्लिम पति द्वारा दिए गए किसी भी फौरी तलाक को अमान्य करार देता है और इसे और गैर कानूनी बनाता है। पीठ ने सीरथ उन नबी अकादमी की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस बात पर नाराजगी जताई कि विभिन्न लोगों और संगठनों ने बड़ी संख्या में रिट याचिकाएं दायर कर रखी हैं । पीठ ने कहा कि एक बार में तीन तलाक के मुद्दे पर 20 से अधिक याचिकाएं लंबित हैं।

पीठ ने अकादमी के वकील से जानना चाहा, ‘‘एक ही मुद्दे पर कितनी याचिकाएं दायर की जायेंगी। प्रत्येक मामले में अधिसूचना आती है और आप सभी जनहित याचिका लेकर आ जाते हैं। इस समय तीन तलाक के मसले पर 20 से अधिक याचिकायें लंबित हैं। क्या हमें 100 याचिकाओं को संलग्न कर देना चाहिए और इन पर सौ साल तक सुनवाई करनी चाहिए ? हम एक ही मसले पर 100 याचिकाओं को नहीं सुन सकते।

एआईएमपीएलबी और कमाल फारुकी की याचिका में कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। शीर्ष अदालत ने अगस्त 2017 में ‘तलाक, तलाक, तलाक’ कह कर संबंध विच्छेद करने की परंपरा को खत्म कर दिया था। इससे संबंधित कानून संसद ने 30 जुलाई को पारित किया था। शीर्ष अदालत ने अगस्त 2017 में तीन बार तलाक कह कर संबंध विच्छेद करने के चलन को असंवैधानिक करार दे दिया था। इसके बाद 30 जुलाई को संसद ने इस संबंध में एक कानून पारित किया था। -(एजेंसी)



 

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