नि:शक्तता कानून मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों पर लागू होते हैं कि नहीं, उच्च न्यायालय करेगा विचार

Samachar Jagat | Thursday, 11 Jul 2019 11:10:31 AM
Disability law applies to people suffering from mental illness, whether or not the High Court will consider

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय इस विधिक प्रश्न पर विचार करने पर सहमत हो गया है कि नि:शक्तता और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े कानून मानसिक बीमारी से पीडि़त लोगों पर लागू होते हैं कि नहीं।

Rawat Public School

न्यायमूर्ति वी के राव ने मानसिक बीमारी से पीडि़त लोगों पर तीन कानूनों - मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, 2017; नि:शक्तजन अधिकार कानून, 2016 और ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मंदबुद्धि एवं कई नि:शक्तता से पीडि़त लोगों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय न्यास कानून, 1999 - पर अमल को लेकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा राम मनोहर लोहिया अस्पताल से जवाब मांगा।

अदालत ने अधिकारियों से यह बताने के लिए भी कहा कि क्या इन तीनों कानूनों के प्रावधानों के तहत मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए अभिभावक नियुक्त करने का नियम है।

यह मामला अदालत के सामने उस वक्त आया जब एक शख्स ने शिजोफ्रेनिया से जूझ रही अपनी 48 वर्षीय बहन के लिए अभिभावक नियुक्त करने के लिए अर्जी दाखिल की, ताकि उसे पारिवारिक पेंशन तथा अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें।

शिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक विकार है। इससे जूझ रहे लोगों में मतिभ्रम होता है और मन में अजीबोगरीब ख्याल आते रहते हैं। -(एजेंसी)



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.