हर घर को 2024 तक मिलने लगेगा पेयजल : शेखावत

Samachar Jagat | Thursday, 27 Jun 2019 12:24:56 PM
Drinking water will be available every home by 2024: Shekhawat

नई दिल्ली। केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने देश में 2024 तक प्रत्येक घर को पाइपलाइन की पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की उम्मीद व्यक्त करते हुये बुधवार को कहा कि सरकार जलसंकट से निपटने के लिये अत्याधुनिक तकनीक सहित सभी उपायों को अपनाने के लिये कृतसंकल्प है। 

शेखावत ने राज्यसभा में जलसंकट पर अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुये सदन के सभी सदस्यों से पानी की उपलब्धता बढ़ाने से जुड़ी योजनाओं को सांसद निधि से बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने आप के सदस्य संजय सिंह को उच्च सदन में इस मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा का प्रस्ताव पेश करने के लिये धन्यवाद देते हुये कहा कि सरकार ने इस आसन्न चुनौती की गंभीरता को समझते हुये ही जलशक्ति मंत्रालय का अलग से गठन किया है ताकि पानी के विषय पर समग्रता से व्यापक नीति बना कर उसे लागू किया जाये। 

शेखावत ने कहा, ‘‘हम 2024 तक हर घर को पेयजल पहुंचाने का प्रयास करेंगे।’’ उन्होंने इस काम में सभी पक्षों से सहयोग की अपील करते हुये कहा कि देश में पेयजल कम नहीं हुआ सिर्फ उचित जल प्रबंधन के अभाव और आबादी बढ़ते बोझ ने इसे गंभीर चुनौती बना दिया है। 

शेखावत ने कहा कि देश में पानी की कुल उपलब्धता का पांच प्रतिशत पेयजल के रूप में, 15 प्रतिशत औद्योगिक कामों में और 80 प्रतिशत कृषि कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि मौजूदा कृषि पद्धति में एक किलो चावल के उत्पादन में 5600 लीटर पानी की खपत होती है, वहीं चीन में यह मात्रा 350 लीटर है। सरकार इस अंतर को तकनीकि शोध आदि के जरिये पूरा करने कोशिश कर रही है जिससे पानी का समुचित इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके। 

शेखावत ने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कृषि उपज को बढ़ावा देने के लिये विभिन्न राज्य सरकारों ने कारगर पहल की है। इनमें हरियाणा सरकार ने धान के बजाय कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया है। इसी तरह जलसंरिंण की दिशा में महाराष्ट्र और राजस्थान ने प्रयास किये है। 

उन्होंने जलसंचय और जलसंरिंण के पारंपरिक तरीकों को ग्रामीण इलाकों से सीखने की जरूरत पर बल देते हुये कहा कि सामुदायिक भागीदारी से जल संचय एवं जल संरक्षण के उपायों को कारगर बनाया जा सकता है। इसमें तालाब, कुंओं और प्राकृतिक जलाशयों का पुनॢनर्माण भी शामिल है। 

उल्लेखनीय है कि संजय सिंह ने जलसंकट को वर्तमान समय और भविष्य में सबसे गंभीर चुनौती बताते हुये सरकार से इससे निपटने के लिये कारगर नीति बनाकर इसे लागू करने की मांग की। 

चर्चा का जवाब देते हुये शेखावत ने कहा भारत में दुनिया का 2.5 प्रतिशत जमीन, चार प्रतिशत पेयजल, 18 प्रतिशत जनसंख्या और 22 प्रतिशत मवेशी हैं। हर साल भारत को 4000 बीसीएम पानी वर्षा से मिलता है। इसमें से 1137 बीसीएम पानी ही उपयोग में लाया जा पाता है। 

उन्होंने पानी की उपलब्धता और उपभोग के बीच असंतुलन को दूर करने की जरूरत पर बल देते हुये कहा कि इसे समुचित जल प्रबंधन की मदद से दूर किया जायेगा। -(एजेंसी)



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.