सरकार सीएसआर पहल के सूक्ष्म प्रबंधन और अनावश्यक हस्तक्षेप को इच्छुक नहीं है : गोयल

Samachar Jagat | Friday, 10 Aug 2018 01:11:03 PM
Government does not want micro-management of CSR initiatives and unnecessary interference: Goyal

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत कई कंपनियों द्वारा खर्च की जाने वाली राशि की निगरानी करना हमारा दायित्व है लेकिन हम इसका सूक्ष्म प्रबंधन (माइक्रो मैनेजमेंट) नहीं करना चाहते हैं और सभी कंपनियों को इसे खर्च करने की स्वायत्ता दी जानी चाहिए।

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जब सीएसआर का विषय होता है तो यह देश के हर नागरिक के लिए होता है। समाज और गरीबों के लिए पूरा खर्च किया जाता है।

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उन्होंने कहा कि अगर कोई सीएसआर परियोजना या कार्यक्रम संबद्ध कंपनी के किसी कर्मचारी या परिवार को फायदा पहुंचाता है तो वह सीएसआर के दायरे में नहीं आएगा। इसके तहत राशि पिछड़े क्षेत्रों और आकांक्षीजिलों में खर्च किया जाना बेहतर होगा।

इसे कहां खर्च करना है कहां नहीं, इस बारे में सरकार का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। गोयल ने कहा कि सीएसआर के तहत राशि खर्च करने के बारे में फैसला कंपनी का निदेशक मंडल और कमेटी करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा यह है कि इसके तहत पैसा अच्छी तरह से खर्च हो और उसकी जवाबदेही भी तय हो।

उन्होंने सांसदों से अपील की कि वह अपने सांसद निधि से राशि आकांक्षी जिलों के लिए दें। उन्होंने स्वच्छ भारत कोष, प्रधानमंत्री राहत कोष और स्वच्छ गंगा कोष में सीएसआर के तहत दी जाने वाली राशि के बारे में एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि इन कोष का उपयोग पूरे देश के लिए किया जाता है।

यह किसी खास क्षेत्र से संबद्ध नहीं होता है। पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार सीएसआर का सूक्ष्म प्रबंधन करने को इच्छुक नहीं है। हम कुल खर्च की गई राशि की सिर्फ निगरानी कर सकते हैं। किन परियोजनाओं पर 2 फीसदी सीएसआर खर्च करना है वह कंपनियों के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है।

यदि कंपनी खर्च नहीं कर रही है तो आप कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से शिकायत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि सीएसआर दिल से होता है। कानून और सरकारों के जरिए इसे नहीं कराया जा सकता है। मंत्री ने बताया कि जब कभी सीएसआर के प्रावधानों का उल्लंघन होने का मामला सामने आता है तब रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) छानबीन के बाद इस तरह की कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करता है।

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वित्त वर्ष 2014 - 15 में 254 कंपनियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दी गई। उन्होंने लिखित उत्तर में बताया कि मंत्रालय ने अप्रैल 2018 में वर्ष 2015-16 से सीएसआर के प्रावधानों को लागू करने के लिए प्रायोगिक आधार पर केंद्रीकृत जांच और अभियोजन तंत्र की स्थापना की है। जांच के आधार पर 272 कंपनियों को प्रारंभिक नोटिस जारी किया गया है। 



 

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