हरियाणा विश्वविद्यालय गैंगरेप: उच्चतम न्यायालय का दो दोषियों को राहत से इंकार

Samachar Jagat | Thursday, 15 Feb 2018 07:40:25 PM
Haryana University gangrape: Supreme Court denies relief to two convicts

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा के एक निजी विश्वविद्यालय में सामूहिक बलात्कार के अपराध में दो दोषियों की बीस-बीस साल की सजा निलंबित करने के आदेश पर लगाई गई रोक हटाने से गुरुवार को इंकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से कहा है कि दोषियों की अपील पर पांच महीने के भीतर फैसला किया जाए।

शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि सामूहिक बलात्कार के इस मामले की खासियत यह है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी जेल में रहे और निचली अदालत से सजा मिलते ही पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।

न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि दोषियों की सजा निलंबित करने पर रोक लगाने से संबंधित उनका अंतिरम आदेश अपील लंबित रहने के दौरान प्रभावी रहेगा। पीठ ने कहा कि हम उच्च न्यायलाय से अनुरोध करते हैं कि इन अपीलों पर पांच महीने के भीतर सुनवाई करके फैसला करे। पीठ ने कहा कि संबंधित पक्षों को निर्देश दिया जाता है कि वे छह मार्च को उच्च न्यायालय में पेश हों।

हालांकि शीर्ष अदालत ने तीसरे आरोपी, जिसे सात साल की कैद की सजा मिली थी, को राहत प्रदान की ओर कहा कि उसकी जमानत का आदेश पांच महीने के भीतर अपील पर फैसला होने तक जारी रहेगा। पीठ ने यह आदेश सामूहिक बलात्कार की शिकार छात्रा की याचिका पर दिया जिसने दोषियों की सजा निलंबित करने और उन्हें जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।

दोषियों में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीडि़त को आईक्लाउड का पासवर्ड दिया गया था और उसने तस्वीरों को उससे हटा दिया था और उसमें कोई भी अश्लील तस्वीर नहीं मिली। पीडि़त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कालिन गोन्साल्विज ने कहा कि ये तस्वीरें हार्ड डिस्क में सेव की गई थीं और एक व्हाट्सऐप समूह, जिसके माध्यम से ये तस्वीरें दूसरों तक पहुंचाई गई थी।

पीठ ने कहा कि हमारे सामने पेश मामले का सारांश दोषी नहीं बल्कि उनकी सजा को निलंबित करना है। आपने पहले दलील दी थी कि उन्होंने (दोषियों ने) आपको (पीडि़त को) धमकी दी थी। शीर्ष अदालत ने भूषण से कहा कि वह उच्च न्यायालय से इस मामले पर तीन से छह महीने के भीतर फैसला लेने का अनुरोध करने पर विचार कर रही है और वह उच्च न्यायालय को सजा निलंबित करने के आदेश को अपील पर फैसला होने तक जारी नहीं रहने देगी। भ्रूषण ने कहा कि न्यायालय इस संबंध में कोई भी कदम उठा सकता है।

निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत दोषियों को बीस-बीस साल की सजा सुनाई थी जबकि तीसरे दोषी को सात साल की सजा सुनाई थी। हालांकि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने दोषियों की सजा निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दे दी थी।

शीर्ष अदालत ने सात फरवरी को कहा था कि वह इस तरह से लगातार ब्लैकमेल करना बर्दाश्त नहीं करेगी और उसने दोषियों से कहा था कि आईक्लाउड का पासवर्ड साझा करें। आरोप है कि इसमें ही उन्होंने महिला के अश्लील चित्र कथित रूप से स्टोर कर रखे हैं। इस महिला ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि अगस्त 2013 में उसने सोनीपत स्थित निजी विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और दोषियों में से एक के साथ उसकी जान पहचान हो गई थी।

उसका यह भी आरोप था कि दोषी उसके अच्छे मित्र बन गए थे, लेकिन उन्होंने उससे बलात्कार किया और उसे अपनी तस्वीरें भेजने के लिए बाध्य किया। इसके बाद से वे उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। पीडि़त ने यह भी दावा किया है कि विश्वविद्यालय परिसर में दो अन्य ने भी बलात्कार किया जिसके बारे में उसने अप्रैल 2015 में प्राथमिकी दर्ज कराई है।-एजेंसी
 



 

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