गृहमंत्री अमित शाह ने कहा भारतवासियों के लिए केवल एक ही आईडी, सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी होगी सिर्फ एक आईडी में

Samachar Jagat | Tuesday, 24 Sep 2019 11:55:14 AM
Home Minister Amit Shah said that only one ID for Indians, all important documents will be known only in one ID

इंटरनेट डेस्क। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक देश, एक राष्ट्र और एक पहचान के तहत सिर्फ एक ही आईडी बनाएं जाने पर बल दिया जा रहा है। आज सभी देशवासियों अपने पास विभिन्न प्रकार की आईडी रखता है। हर कार्य के लिए अलग-अलग आईडी की आवश्यकता होती हैं। ऐसे में केन्द्र सरकार द्वारा ऐसी आईडी बनाएं जिसमें कि सभी मुख्य आईडी का विवरण हो। आधार कार्ड होने के बावजूद भी आज सभी प्रकार की आईडी साथ में रखनी पड़ती है। ऐसे में आज ऐसी आईडी की आवश्यकता है जिसमें आधार, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और बैंक खाते जैसी सभी सुविधाएं जुड़ी हों।


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शाह ने यह भी कहा कि जनगणना 2021 के आंकड़े मोबाइल एप के जरिए जुटाए जाएंगे। गृह मंत्री ने कहा कि इस तरह की प्रणाली भी होनी चाहिए जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु होते ही यह जानकारी जनसंख्या आंकड़े में ज्ञात हो जाए। उन्होंने कहा कि  आधार, पासपोर्ट, बैंक खाते, ड्राइविंग लाइसेंस, और वोटर कार्ड जैसी सभी सुविधाओं के लिए एक ही कार्ड हो सकता है। जनगणना को अमित शाह ने देश के सामाजिक प्रवाह, देश के अंतिम व्यक्ति के विकास और देश के भविष्य के काम के आयोजन के लिए आधार बताते हुए कहा कि जनगणना की पूरी बिल्डिंग ग्रीन बिल्डिंग होगी, भारत में ग्रीन बिल्डिंग के कॉन्सेप्ट को अपनाने की जरूरत है।

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अमित शाह ने कहा कि सरकार इस बार की जनगणना में अभी तक का सबसे ज्यादा व्यय करने जा रही है। हम इस बार की जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने में करीब 12 हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रहे हैं। तकनीक के आधुनिक रूप का उपयोग करते हुए 2021 में डिजिटल तरीके से जनगणना की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सन् 1865 में सबसे पहले जनगणना की गई तब से लेकर आज 16वीं जनगणना होने जा रही है। कई बदलाव और नई पद्धति के बाद आज जनगणना डिजिटल होने जा रही है। उन्होंने कहा कि ष्पेपर जनगणना से डिजिटल जनगणना का जतंदेवितउंजपवद होने का काम 2021 की जनगणना के बाद समाप्त होगा। जनगणना का डिजिटल डाटा उपलब्ध होने से अनेक प्रकार के विश्लेषण के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। अमित शाह ने कहा कि साल 2014 में नरेन्द्र मोदी जी के देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद हमारे सोचने की क्षमता में बदलाव होने लगा। देश को समस्याओं से मुक्त किया जाए, ऐसी प्लानिंग की शुरुआत 2014 के बाद हुई है। 
 



 

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