ऐसा किया तो एयरलाइंस होगा यात्रियों को भुगतान करने के लिए उत्तरदायी

Samachar Jagat | Wednesday, 14 Feb 2018 07:22:53 PM
If so, then the airline will be liable to pay the passengers

नई दिल्ली। विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया है कि वह विमानों में जरूरत से ज्यादा सीटों की बुकिंग करने की अनुमति नहीं देता है और कन्फम्र्ड टिकटों के बावजूद जिन यात्रियों को सवार होने से इनकार किया जाता है उन्हें भुगतान करने के लिए एयरलाइंस उत्तरदायी होगी।

एयर इंडिया ने भी अदालत के समक्ष यह स्वीकार किया कि यदि किसी यात्री की कन्फम्र्ड टिकट होने के बावजूद उसे विमान में सवार होने की अनुमति नहीं दी जाती है तो यह सेवा में त्रुटि होगी और उपभोक्ता को उसके लिए क्षतिपूर्ति के लिए दावा करने का अधिकार होता है।

डीजीसीए और एयर इंडिया के स्पष्ट रूख के बाद न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने कहा कि इस सवाल की जांच जानी जरूरी नहीं है कि विमानन नियामक को क्या इस संबंध में नागरिक उड्डयन नियमों (सीएआर) को जारी करने का अधिकार है या नहीं। एक व्यक्ति ने एक याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने डीजीसीए द्वारा जारी की गई एक 2010 सीएआर पर सवाल उठाए थे। डीजीसीए और एयर इंडिया ने इस याचिका पर जवाब दिया।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सीएआर विमान में सीटों की ओवर बुकिंग की अनुमति देते है जिसे मंजूर नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि डीजीसीए को विमान में सवार होने की अनुमति देने से इनकार किए जाने वाले यात्रियों को क्षतिपूर्ति देने पर रोक लगाने संबंधी निर्देश जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।

हालांकि डीजीसीए के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने सीएआर को गलत तरीके से समझ लिया है कि डीजीसीए इस तरह के निर्देश देता है जबकि यह सुनिश्चित करने के लिए नियम जारी किए गए हैं कि यात्रा करने से इनकार किए जाने वाले यात्रियों को तत्काल भुगतान किया जाएगा और संबंधित एयरलाइन द्वारा उनकी यात्रा के लिए प्रबंध किए जाए।

एयर इंडिया के वकील ने डीजीसीए के रूख का समर्थन करते हुए कहा कि क्षतिपूर्ति के लिए दावे करने के यात्रियों के अधिकार पर सीएआर द्वारा रोक नहीं लगाई गई है और याचिकाकर्ता ने 12 दिसम्बर, 2015 को दिल्ली से पटना की यात्रा के लिए अनुमति नहीं दिए जाने के लिए एयर इंडिया से किसी तरह के क्षतिपूर्ति की कोई मांग नहीं की थी।

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसे 12 दिसम्बर, 2015 को दिल्ली से पटना की यात्रा करनी थी और अगले दिन वापस लौटना था। उसने पहले ही 28 अक्टूबर, 2015 को एयर इंडिया से टिकट बुक करा ली थी। उन्होंने दावा किया कि जब वह यात्रा वाले दिन हवाई अड्डे पहुंचा तो एयरलाइन्स ने उसे विमान में सवार होने से इनकार कर दिया।

एयरलाइन्स का कहना था कि विमान में जरूरत से ज्यादा यात्री सवार हैं। कन्फम्र्ड टिकट होने के बावजूद वह तय समय पर पटना नहीं पहुंच सके। यात्री के कोई अन्य राहत की मांग नहीं किए जाने के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।-एजेंसी
 



 

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