कश्मीर में आतंवादी बिना इंटरनेट के भी कर रहे आपस में बातचीत 

Samachar Jagat | Monday, 02 Sep 2019 11:05:45 AM
In Kashmir, terrorists are talking among themselves even without

इंटरनेट डेस्क। जम्मू-कश्मीर से संविधान की धारा 370 को हटा देने के बाद घाटी में शांति स्थापित करने के लिए पिछले दिनों से इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी। कश्मीर घाटी में टेलीफोन और इंटरनेट सेवा बंद रखने के बावजूद पाकिस्तान अलगाववादियों और स्थानीय आतंकवादियों से विभिन्न ऑफलाइन एप्स और हाई-एनक्रिप्टेड एनॉनमस चैट प्लेटफार्म के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं।

कश्मीर के फर्जी वीडियो बनाकर फैलाने का कार्य किया जा रहा है। इन एप को ट्रैक करना भी बहुत कठिन काम है। इसके चलते सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किलें पैदा हो रही हैं। यह वैश्विक स्तर पर आतंकवादियों के नेटवर्क और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच लोकप्रिय है।

टॉर लोगों की लोकेशन पता लगाने या उपयोगकर्ताओं की ब्राउजिंग आदतों पर जासूसी करने से रोकता है। यह विंडोज, मैक, लिनक्स और एंड्रायड के लिए उपलब्ध है। टॉर का प्रयोग प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा करने में किया जाता है, क्योंकि इसमें सरकार के साइबर सेल से पकड़े जाने का खतरा नहीं होता है।

इस एप्स से लोग एक-दूसरे से बिना मोबाइल नेटवर्क के वाईफाई या ब्लूटूथ के माध्यम से 100-200 मीटर की रेंज में संपर्क कर सकते हैं। ये एप्स इंटरनेट कनेक्शन या 2 जी, 3 जी या 4 जी नेटवर्क कवरेज के बिना भी काम करते हैं, कुछ हद तक आइओएस और एंड्रॉयड के लिए उपलब्ध वॉकी-टॉकी एप की तरह। यह फेसबुक या वाट्सएप और मेश नेटवर्क की तरह काम करते हैं।

डब्ल्यूडब्लयूडब्ल्यू गीको एंड फ्लाई डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार मेश नेटवर्क तभी काम करता है, जब दो या अधिक स्मार्टफोन एक दूसरे की रेंज में होते हैं। यह दूरी या कवरेज स्मार्टफोन के सिग्नल की मजबूती पर निर्भर करता है। यह एक से दूसरे मॉडल में अलग-अलग हो सकता है, जो कि सामान्यतरू दो स्मार्टफोन के बीच 100 फीट होती है।
 



 

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