जानिए! भारत समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं मानने वाला कौनसे नबंर का देश बना

Samachar Jagat | Friday, 07 Sep 2018 12:04:21 PM
India becomes the 126th country to consider homosexual relations not to be a crime

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को एकमत से दी गई अपनी व्यवस्था में कहा कि परस्पर सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिक यौन संबंध अपराध नहीं हैं। न्यायालय ने कहा कि ऐसे यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखने संबंधी भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के प्रावधान से संविधान में प्रदत्त समता और गरिमा के अधिकार का हनन होता है। 

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के साथ ही भारत उन 125 (रिपीट) (125) अन्य देशों के साथ जुड़ गया, जहां समलैंगिकता वैध है। लेकिन दुनियाभर में अब भी 72 ऐसे देश और क्षेत्र हैं जहां समलैंगिक संबंध को अपराध समझा जाता है। उनमें 45 वे देश भी हैं जहां महिलाओं का आपस में यौन संबंध बनाना गैर कानूनी है। 

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 सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बृहस्पतिवार को भादंसं की धारा 377 के तहत 158 साल पुराने इस औपनिवेशिक कानून के संबंधित हिस्से को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया और कहा कि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। 

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इंटरनेशनल लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांस एंड इंटरसेक्स एसोसिएशन के अनुसार आठ ऐसे देश हैं जहां समलैंगिक संबंध पर मृत्युदंड का प्रावधान है और दर्जनों ऐसे देश हैं जहां इस तरह के संबंधों पर कैद की सजा हो सकती है। 

परस्पर सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध अपराध नहीं, धारा 377 समता के अधिकार का उल्लंघन : न्यायालय 

जिन कुछ देशों समलैंगिक संबंध वैध ठहराए गए हैं उनमें अर्जेंटीना, ग्रीनलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, आईसलैंड, स्पेन, बेल्जियम, आयरलैंड, अमेरिका, ब्राजील, लक्जमबर्ग, स्वीडन और कनाडा शामिल हैं। 



 

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