आतंकवाद का मुकाबला और कानून लागू करने के लिए नई प्रौद्योगिकियां अपनाने का आह्वान

Samachar Jagat | Friday, 07 Sep 2018 10:32:21 AM
Involvement of new technologies to combat terrorism and enforce law

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों से नई प्रौद्योगिकी अपनाने का आह्वान किया है ताकि आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा के लिए उभरने वाली चुनौतियों का मुकाबला करने में उनकी क्षमताओं में बढ़ोत्तरी हो सके।

गृह मंत्री ने गुरुवार को यहां 3 दिवसीय रक्षा और आंतरिक सुरक्षा प्रदर्शनी एवं सम्मेलन-2०18 का उद्घाटन करते हुए कहा कि इंडिया को कईं वर्षों से आतंकवाद और देश की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जो सुरक्षा की द्बष्टि से काफी संवेदनशील हैं।

इसका आयोजन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के सहयोग से पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल ने किया है। सिंह ने कहा कि सरकार हाल में घोषित नई ड्रोन नीति को जल्द लागू करेगी और इसमें ड्रोन के इस्तेमाल के संबंध में समग्र नियम होंगे।

उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान ड्रोन का व्यापक इस्तेमाल कर रहे हैं। ड्रोन का इस्तेमाल संवेदनशील क्षेत्रों तथा वामपंथी उग्रवाद से पीड़ित क्षेत्रों की निगरानी के लिए किया जाता है, जहां निगरानी दल की तैनाती करना कठिन है।

सिंह ने खासतौर से जम्मू-कश्मीर, गुजरात और असम में आतंकवाद संबंधी गतिविधियों की रोकथाम और निगरानी के लिए प्रौद्योगिकी के उन्नयन और आधुनिकीकरण करने की घोषणा करते हुए कहा कि जम्मू क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकी सुविधा जल्द शुरू की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल दुनिया के सबसे लंबे सीमा क्षेत्र की सुरक्षा में तैनात हैं, जिनकी लंबाई 7,500 किलोमीटर से अधिक है। इनमें से लगभग 900 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में बाड़ लगाना संभव नहीं है। इतने लंबे सीमा क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी के लिए हमें लेजर, रडार और अन्य आधुनिक तकनीकों की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा कि साइबर अपराध आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा खतरा है तथा इसका मुकाबला करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए गृह मंत्रालय ने एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया है।

इस दौरान केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल(सीआरपीएफ )के निदेशक राजीव राय भटनागर ने राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में तैनात अर्द्धसैनिक बलों के विषय में एक प्रस्तुतिकरण दिया और भावी आवश्यकताओं का खाका भी पेश किया।



 

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