जम्मू-कश्मीर: बीडीसी चुनाव में बीजेपी को समर्थन देंगे एनसी, पीडीपी के पंचायत सदस्य

Samachar Jagat | Saturday, 05 Oct 2019 11:50:48 AM
Jammu and Kashmir: NC, PDP Panchayat members to support BJP in BDC election

इंटरनेट डेस्क। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाए जाने के बाद पहली बार स्थानीय निकायों के चुनाव होने जा रहे हैं। इन चुनावों में नैशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के स्थानीय प्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का समर्थन करने जा रहे हैं। एनसी और पीडीपी के पंचायत सदस्य आगामी ब्लॉक डिवेलपमेंट काउसिंल (बीडीसी) चुनाव में बीजेपी का समर्थन करने वाले हैं।


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दोनों ही पार्टियों के आला नेता, एनसी के फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, अभी बीते 5 अगस्त से ही नजरबंद हैं। ऐसे में इनके पंचायत प्रतिनिधियों को लगता है कि वे अपने शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति में जमीनी स्तर पर अपना प्रभाव फिर से स्थापित कर पाएंगे। नैशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के साथ-साथ कांग्रेस के भी कुछ पंचायत सदस्यों ने बीजेपी में शामिल होने तक का फैसला कर लिया है ताकि वे बीडीसी के चेयरपर्सन के चुनाव में भगवा पार्टी के प्रत्याशी को अपना समर्थन दे सके। यही नहीं बीजेपी भी अन्य दलों के प्रभावशाली पंचायत सदस्यों को साथ लाने और बीडीसी चुनाव में अपने प्रत्याशी को समर्थन देने के लिए संपर्क कर रही है।

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एनसी, पीडीपी, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के उम्मीदवार अपने शीर्ष पार्टी नेताओं से मुलाकात नहीं कर पा रहे हैं। उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत घाटी के कई बड़े नेता 5 अगस्त से नजरबंद हैं। कश्मीर में नामांकन पत्र भरने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते दक्षिण कश्मीर स्थित कुलगाम के एक सरपंच निसार अहमद ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में प्रासंगिक बने रहने के लिए उनके पास बीजेपी को समर्थन देने के अलावा विकल्प क्या है? निसार अहमद ने बीजेपी के टिकट पर पर्चा भरा है और भगवा पार्टी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह उनके खिलाफ ब्लॉक से कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। एक अन्य सरपंच ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि यह चुनाव बहुत जल्दबाजी में करवाए जा रहे हैं और हर कोई डर के मारे अपनी आवाज उठाने से हिचक रहा है। उन्होंने कहा कि सेलेक्शन है जिसमें किसी के पास कोई विकल्प नहीं है।

कश्मीर घाटी के 10 जिलों में सरपंच और पंच के कुल 19,578 पद हैं जिनमें से सिर्फ 7,029 सीटों पर ही प्रतिनिधि चुने गए हैं। इसका मतलब है कि बीडीसी चुनाव में जिन वोटरों को अपने वोट देने हैं, उसमें से 64 फीसदी वोटर नदारद हैं। सबसे बुरी स्थिति घाटी के दो शहरों, पुलवामा और शोपियां में है जहां पंचायत की 90 फीसदी से अधिक सीटें खाली हैं। पुलवामा में पंचायत के 1,710 पदों में से सिर्फ 132 पदों पर ही प्रतिनिधि मौजूद हैं। इसके अलावा शोपियां में 889 पदों के सापेक्ष सिर्फ 82 पदों पर ही प्रतिनिधियों का चुनाव हो सका है। इस तरह बीडीसी चुनाव के दौरान पुलवामा में 92.3 और शोपियां में 90.8 फीसदी वोटर वोट डालने के लिए मौजूद नहीं होंगे। 
 



 

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