राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने तीर्थंकरों से प्रेरणा लेकर अहिंसा का मार्ग अपनाया :नायडू

Samachar Jagat | Sunday, 11 Feb 2018 05:20:08 PM
Mahatma Gandhi took inspiration from the pilgrims and adopted the path of non-violence

जयपुर। गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली स्वामी महामस्तकाभिषेक महोत्सव के पंचकल्याणक में चौथे दिवस शनिवार को राज्याभिषेक महोत्सव में उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने कहा कि 'जीओ और जीने दो’ से बड़ा कोई सन्देश नहीं हो सकता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने तीर्थंकरों से प्रेरणा लेकर अहिंसा का मार्ग अपनाया, भगवान बाहुबली का महामस्तकाभिषेक महोत्सव हमें भगवान बाहुबली एवं तीर्थंकरों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा।

गुरुओं का आशीर्वाद लेना हमारी परम्परा रही है। गुरु हमें सद्ज्ञान व सद्बुद्धि देने वाले हैं, पैदल धर्म का प्रबोधन करना मामूली कार्य नहीं है। जैनधर्म के त्रिरत्न सम्यक्दर्शन, ज्ञान, आचरण बहुत जरूरी है। धार्मिक भावना हमारी पहचान है, पूजा पद्धति अलग-अलग हो सकती है, लेकिन देश के लिए जीना हमारी जीवन पद्धति है। जैन समाज के लोग समाज के लिए खर्च करते हैं यह अच्छी बात है। आज पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है। अपनी रोटी बांटकर खाना भारतीय संस्कृति है, मैं यहां आकर बहुत आनंद महसूस कर रहा हूं, जीवन में शिक्षा फिर सेवाभाव व समाज में कुछ करने का भाव होना मानव सेवा है।

नायडू ने कन्नड़, हिन्दी, अंग्रेजी भाषा में भारतीय संस्कृति, भगवान बाहुबली का संदेश, सत्य अहिंसा, श्रवणबेलगोला के इतिहास, सम्राट चन्द्रगुप्त, आचार्य भद्रबाहु, चन्द्रगिरि पर्वत की चर्चा करते हुए कई आयामों को छुआ और कहा कि कोई जाति उच्च व नीच नहीं होती, दूसरों की पूजा पद्धति की अवहेलना करना हमारी पद्धति नहीं।

अलग भाषा, अलग वेश - भारत हमारा देश एक रहा है। अपने विधायक कार्यकाल में श्रवणबेलगोला दर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी विगत 48 वर्षो से श्रवणबेलगोला के लिए समर्पित व्यक्तित्व बताया। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागरजी महाराज ने बताया कि मंच पर पहुंचने के साथ ही उपस्थित राष्ट्रगौरव आचार्य वर्धमानसागरजी महाराज सहित 350 पिच्छीधारी आचार्य मुनिराज, आर्यिका माताजी को नमन कर उनका आशीर्वाद लिया।

मंच पर उपराष्ट्रपति नायडू के साथ कर्नाटक राज्यपाल वजूभाई वाला, केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक व संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार, कर्नाटक राज्य सरकार के केबिनेट मंत्री ए. मंजू, कपड़ा मंत्री रुद्रप्पा एम. लमानी, बैंगलोर सेन्ट्रल सांसद एस.पी. मोहन, श्रवणबेलगोला विधायक बालकृष्ण, महोत्सव अध्यक्ष सरिता एम. जैन, कार्याध्यक्ष एस. जितेन्द्रकुमार, डिप्टी कमिश्नर रोहिणी सिधूंड़ी उपस्थित थे। राष्ट्रगान के साथ प्रारम्भ राज्याभिषेक समारोह में भगवान बाहुबली की स्तुति सोम्या-सर्वेश जैन ने प्रस्तुत की। स्वागत भाषण कर्नाटक राज्य महामस्तकाभिषेक कमेटी के अध्यक्ष व प्रभारी मंत्री ए. मंजू ने दिया।

श्रवणबेलगोला के प्राकृत संस्थान को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करेंगे

केन्द्रीय मंत्री अनंतकुमार ने कहा कि आज विश्व को बाहुबली टेक्नालॉजी की आवश्यकता है, अहिंसा-त्याग-शांति-मैत्री-प्रगति बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पूज्य भट्टारक स्वामीजी की प्रेरणा से जो प्राकृत संस्थान चलाया जा रहा है उसे पहला प्राकृत विश्वविद्यालय भारत सरकार विकसित करेगी, केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसके लिए अपनी सहमति प्रदान कर दी है। भगवान महावीर जन्मभूमि वैशाली में भी प्राकृत विश्वविद्यालय होना चाहिए इस हेतु मैं बिहार सरकार से भी चर्चा करूंगा। प्राकृत के दो विश्वविद्यालय सम्पूर्ण विश्व में दीप स्तम्भ का कार्य करेंगे। उन्होने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी महामस्तकाभिषेक में आएंगे

राज्याभिषेक कर शुभारंभ हुआ समारोह

पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी के नेतृत्व में उपराष्ट्रपति वैंकेय्या नायडू व अतिथियों ने सौधर्म इन्द्र भागचंद-सुनितादेवी चूड़ीवाल गोहाटी के साथ सर्वप्रथम भगवान ऋषभदेव को मोती हार, मुकुट पहनाया व राज्याभिषेक किया। आरती के साथ उपराष्ट्रपति, राज्यपाल व सौधर्म इन्द्र व अतिथियों ने चंवर ढुराये।

राज्यपाल वजूभाई वाला ने कहा सबसे ज्यादा दान देने वाला समाज है जैन समाज 

कर्नाटक राज्य के राज्यपाल वजूभाई वाला ने कहा कि याग में जो आनंद है उपभोग में नहीं है, यहां जितने भी साधु संत विराजमान हैं उन्होंने याग किया है इसीलिए हम दर्शन करने के लिए आते हैं। सबसे सुखी सम्पन्न लोग, सबसे ज्यादा सम्पत्ति वाले जैनधर्म के लोग हैं तो सबसे ज्यादा दान देने वाला समाज भी जैन समाज है। जितनी ताकत है उतने पैसे कमाइये, लेकिन समाज को समर्पित भी कीजिए।

राणा प्रताप में ताकत थी, भामाशाह के पास सम्पत्ति दोनों का मिश्रण हुआ विजय मिली। 'क्षमा वीरस्य भूषणम् बताते हुए उन्होंने कहा कि वीर ही क्षमा कर सकता है कमजोर नहीं। गीता में लिखा है कि जो धर्म विरुद्ध कार्य करे उसे समाप्त कर दो। उल्लेखनीय है कि वजूभाई वाला ने जोरदार जयकार लगाकर भगवान बाहुबली की जय-जयकार उपस्थितजनों से कराकर सबका मन मोह लिया।

108 पुस्तकों का प्रकाशन :-

महामस्तकाभिषेक में श्रुत साहिय प्रकाशन व अप्रकाशित साहिय को प्रकाशित करने की भावना अनुसार 108 पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। जिनका विमोचन उपराष्ट्रपति नायडू ने पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी के साथ किया। पूज्य स्वामीजी ने उन्हें पुस्तकें भी भेंट की। स्वामीजी ने कहा कि महामस्तकाभिषेक केवल जुलूस नहीं, उत्सव नहीं, पूजा नहीं यह जनकल्याण, शिक्षा, सांस्कृतिक संस्कृति संवर्धन का कार्य भी है। एक करोड़ रुपए की लागत से उक्त कार्य सम्पन्न हुआ है।

साधुओं की जितनी भक्ति करें कम है : पूज्य भट्टारक स्वामीजी

पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी ने कहा कि राज्याभिषेक बहुत पवित्र कार्य है। साधु संत यहां दो हजार किलोमीटर का पद विहार करके आए हैं, इनकी जितनी भक्ति हम करें कम है। सन् 1981, 1993, 2006 के महामस्तकाभिषेक का इतिहास बताते हुए स्वामीजी ने कहा कि संस्कृति संरक्षण के लिए कार्य करते हुए नायडू यहां तक पहुंचे हैं। समाज को ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता है। केन्द्रीय मंत्री अनंतकुमार के बारे में उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार से आवश्यक सहयोग आमंत्रण देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। श्रवणबेलगोला को उनका बहुत सहयोग प्राप्त होता है। 



 

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