कानून मंत्रालय मंत्री केवल 'पोस्ट ऑफिस’ नहीं :रविशंकर

Samachar Jagat | Tuesday, 12 Jun 2018 01:28:50 PM
Ministry of Law Minister not only 'post office' Ravi Shankar

नयी दिल्ली। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ की पदोन्नति से जुड़े विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज कहा कि कानून मंत्रालय एवं कानून मंत्री को केवल'पोस्ट ऑफिस’भर नहीं समझा जाना चाहिए। रविशंकर प्रसाद ने न्याय विभाग की ओर से ऑनलाइन मॉनिटरिग पोर्टल एवं मोबाइल ऐप'न्याय विकास’के लोकार्पण के अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि न्यायपालिका से अपील है कि वह आपसी विवाद खुद ही सुलझाए, साथ ही राजनीतिक दलों से भी अनुरोध है कि वे अपने फायदे के लिए न्यायपालिका के विवाद का राजनीतिकरण न करे।

उन्होंने कहा, लेकिन मैं यह विनम्रता के साथ यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि कानून मंत्री और कानून मंत्रालय के भी अपने संवैधानिक अधिकार हैं। कानून मंत्रालय या कानून मंत्री केवल'पोस्ट ऑफिस’नहीं है। उनका आशय न्यायमूर्ति जोसेफ की पदोन्नति के लिए कॉलेजियम की ओर से उनका नाम दोबारा भेजने के प्रस्ताव से था। उन्होंने न्यायमूर्ति जोसेफ का नाम लिये बिना कहा कि पदोन्नति के लिए भेजे गये नाम पर पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम को कहकर सरकार ने कोई पाप नहीं किया है।

श्री प्रसाद ने कहा, हमारी संवैधानिक भूमिका है। हम सादर एवं विनम्रता से अपने विचार रखते रहेंगे, भले ही कॉलेजियम कोई भी निर्णय क्यों न ले? कॉलेजियम प्रणाली में भी 1993, 1998 और 1999 के (शीर्ष अदालत के) तीन फैसलों में भी न्यायाधीशों के नाम पर'पुनर्विचार’का अधिकार सरकार को दिया गया है।

कानून मंत्री ने अधीनस्थ अदालतों में प्रतिभावान लोगों की न्यायिक अधिकारियों के तौर पर नियुक्ति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा की वकालत की, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह आईएएस एवं आईपीएस की तर्ज पर राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग के गठन की बात नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले भी संघ लोक सेवा आयोग की ओर से अखिल भारतीय न्यायिक सेवा परीक्षा आयोजित कराने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन नौ उच्च न्यायालयों ने निचली अदालतों के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के प्रस्ताव का विरोध किया था। इस अवसर पर विधि एवं न्याय राज्यमंत्री पी पी चौधरी और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने भी अपने विचार व्यक्त किये। ऐजेंसी



 

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