वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सम्मिलित प्रयास की जरूरत : नीतीश

Samachar Jagat | Thursday, 06 Jun 2019 10:06:11 AM
Need of joint effort to control air pollution: Nitish

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सबको मिलकर काम करने की जरूरत है। कुमार ने यहां ज्ञान भवन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से आयोजित पर्यावरण दिवस समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनकी भचता रही है लेकिन स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बापू ने काफी पहले ही चिंता प्रकट की थी। वह हमेशा कहा करते थे कि यह पृथ्वी हमारी जरूरतों को पूरा कर सकती है, लालच को नहीं। वहीं, डॉ. राममनोहर लोहिया ने स्वच्छता और शौचालय निर्माण पर 50 के दशक में ही काफी जोर दिया था। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए सबको मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि संपीड़ति प्राकृतिक गैस (सीएनजी) या बैट्री से चलने वाले वाहनों को इस्तेमाल में लाये जाने से वायु प्रदूषण से छुटकारा मिलेगा। उन्होंने कहा कि छठ पूजा में जिस प्रकार चार दिनों तक लोग अपने घर एवं आस-पास साफ-सफाई रखते हैं यदि उसी तरह की भावना लोगों में आ जाए तो इससे काफी परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमें पूरी उम्मीद है कि जो प्रयास हमलोगों ने शुरू किये हैं, वह आपसी सहयोग से इतना प्रभावी होगा कि उसके अच्छे परिणाम जल्द ही देखने को मिलेंगे। इससे न केवल पर्यावरण संतुलित रहेगा बल्कि अनेक तरह के संकटों से भी मुक्ति मिलेगी। 

कुमार ने कहा कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए हमलोग हरसंभव कोशिश में जुटे हैं। साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जो कचरा संग्रहित हो रहा है, उसका 80 प्रतिशत किसी न किसी काम में उपयोग किया जा रहा है। कचरे से निकलने वाली प्लास्टिक का सडक़ों के निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। इसी तरह गंदे पानी की सफाई कर इसे सिंचाई के काम में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में बहुत ज्यादा पर्यावरण को संकट में डालने वाली आदत नहीं है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सामान्यत: 15 जून को जबकि केरल में 01 जून को मॉनसून आ जाता था। जब वह पढ़ते थे, उस समय बिहार में औसतन 1200-1500 मिलीमीटर बारिश हुआ करती थी, जो अब घटकर पिछले साल 771 मिलीमीटर रह गयी है। उन्होंने कहा कि पिछले 13 वर्षों में मात्र दो साल ही करीब 1000 मिलीमीटर बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष जेठ माह में पुरवैया हवा चल रही है। इसका मतलब है कि सावन और भादो महीने में वर्षा कम होगी और धूल उड़ेंगे। वर्षापात कम होने से जलस्तर नीचे जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमलोग राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं और गंगा किनारे 12 जिलों में जैविक सब्जी पर अनुदान देने की स्कीम शुरू की गयी है। आजकल धीरे-धीरे पूरे बिहार में फसलों के अवशेष को खेतों में ही जलाने का प्रचलन बढ़ रहा है, जो अफसोसजनक और चिंता का विषय है। इससे वायु प्रदूषित होती है। उन्होंने कहा कि वह सभी जिलाधिकारियों से भी कहेंगे कि जो लोग किसानों को इस तरह का सुझाव दे रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर उन पर कारवाई करें।’’

कुमार ने कहा कि वर्ष 2012 में उन्हें चीन जाने का मौका मिला और वहां सात दिनों तक उन्हें चार से पांच शहरों में रुकने का अवसर मिला। लेकिन, एक जगह छोडक़र कहीं भी चिडिय़ा नहीं दिखी। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह तेजी से विकास की जल्दबाजी रहेगी तो अनेक तरह के संकटों से जूझना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जब उनकी सरकार बनी तब बिहार का हरित आवरण नौ प्रतिशत था। हरियाली मिशन के तहत मिशन मोड में काम करते हुए करीब 23 करोड़ पौधे लगाये गये, जिसका परिणाम हुआ कि वर्ष 2015 तक बिहार का ग्रीन कवर 15 प्रतिशत पर पहुंच गया। आबादी को देखते हुए इस लक्ष्य को बढ़ाकर 17 प्रतिशत तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि उन्हें जापान में कहीं भी गंदगी नहीं दिखी। वहां आस-पास पेड़ लगाने की प्रतिस्पर्धा के कारण पेड़ों की लम्बाई जितनी 100 साल में होनी चाहिए, वह 10 साल में ही हो गयी। उन्होंने वन संरक्षक एवं अपने विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह को निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री आवास में जो खाली स्थान हैं, वहां जापान की तरह पेड़ों को लगाकर प्रयोग कर लें। प्राप्त अनुभव के आधार पर उसे अन्य स्थानों पर प्रयोग में लाया जाएगा।

समारोह को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, मुख्य वन संरक्षक देवेन्द्र कुमार शुक्ल, बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार घोष, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद, वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी कुमार रवि, एनसीसी कैडेट्स सहित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अलावा नगर विकास एवं आवास विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे। -(एजेंसी)
 



 

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