शुद्ध जल और प्राणवायु बिना मानवीय अस्तित्व की परिकल्पना नहीं :लालजी

Samachar Jagat | Saturday, 18 May 2019 08:32:16 AM
No idea of human existence without pure water and oxygen: Lalji

पटना।  बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन ने पर्यावरण संतुलन पर लगातार आते खतरों से आगाह करते हुए आज कहा कि शुद्ध जल और प्राणवायु के बगैर मानवीय अस्तित्व की परिकल्पना नहीं की जा सकती। 

टंडन ने यहां राजभवन में ‘बौद्ध धर्म और पर्यावरण’ नामक पुस्तक को लोकार्पित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पर्यावरण के संतुलन और शुद्धि के प्रति शुरू से ही सजग-सचेत रही है। वैदिक ऋचा में पृथ्वी को माता और मनुष्य को उसका पुत्र कहा गया है। प्रकृति के साथ मनुष्य के रागात्मक रिश्ते और साहचर्य को सम्पूर्ण वैदिक वांगमय में पर्याप्त सम्मान मिला है। 

राज्यपाल ने कहा कि ‘यत भपडे तत् ब्रह्माण्डे’ की भावना से प्रेरित भारतीय मनीषा और चिन्तन-धारा ने सम्पूर्ण प्रकृति और मनुष्य के निकट संबंध को पूरी संवेदनशीलता के साथ ग्रहण किया है। बौद्ध-धर्म भी प्रकृति के साथ मनुष्य की सन्निकटता का सार्थक संदेश देनेवाला एक प्रेरणादायी पथ-प्रदर्शक है। 

टंडन ने कहा कि आज पर्यावरण-संतुलन पर विभिन्न तरह के खतरे मंडराने लगे हैं। उन्होंने कहा कि दुनियां के सामने अगला सबसे बड़ा संकट ‘जल’ को ही लेकर आने वाला है। जलाशय सूख रहे हैं, मिट रहे हैं। पृथ्वी से जल-निकासी कर इसकी उर्वरता छीनने का अपराध किया गया है। यदि अब भी नहीं संभले तो प्रकृति का प्रकोप झेलने को अभिशप्त होंगे। शुद्ध जल और प्राणवायु के बगैर मानवीय अस्तित्व की ही परिकल्पना नहीं की जा सकती। एजेंसी
 



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.