आरूषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपति की रिहाई के खिलाफ अपीलों पर न्यायालय सुनवाई को तैयार

Samachar Jagat | Friday, 10 Aug 2018 04:46:27 PM
Prepare court hearing on appeals against release of Talwar couple in Aarushi-Hemraj murder case

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट 2008 के सनसनीखेज आरूषि-हेमराज हत्याकांड में राजेश और नूपुर तलवार को बरी करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई के लिए शुक्रवार को सहमत हो गया। इस अपील पर हेमराज की पत्नी की अपील के साथ ही सुनवाई की जाएगी।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने कहा कि सीबीआई की अपील पर हेमराज की पत्नी द्वारा दायर अपील के साथ ही सुनवाई की जाएगी। पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद जांच ब्यूरो की अपील विचारार्थ स्वीकार कर ली।

दिल्ली पुलिस में 4,000 से ज्यादा कर्मियों की भर्ती पर गंभीरता से विचार: राजनाथ

इन दोनों अपील में तलवार दंपत्ति को बरी करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 12 अक्टूबर, 2017 के निर्णय को चुनौती दी गई है। जांच ब्यूरो की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल मनिन्दर सिंह ने इस मामले में पहले से ही लंबित हेमराज की पत्नी की अपील का हवाला दिया।

इस पर पीठ ने कहा कि जांच ब्यूरो की अपील उसके साथ ही संलग्न की जाएगी। दंत चिकित्सक दंपत्ति राजेश और नूपुर तलवार की 14 वर्षीय बेटी आरूषि मई, 2008 को अपने नोएडा स्थित घर में मृत मिली थी। आरूषि की गर्दन किसी धारदार वस्तु से काटी गई थी।

इस मामले की जांच के दौरान शुरू में संदेह 45 वर्षीय घरेलू सेवक हेमराज पर गया क्योंकि वह लापता था परंतु दो दिन बाद घर की छत से उसका छव बरामद हो गया था। इस हत्याकांड की ठीक तरीके से जांच नहीं करने पर उत्तर प्रदेश पुलिस की तीखी आलोचना हुई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इसकी जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने की सिफारिश की।

इसके बाद जांच ब्यूरो ने इस हत्याकांड की जांच अपने हाथ में ले ली थी। इस दोहरे हत्याकांड मेें गाजियाबाद स्थित सीबीआई की अदालत ने 26 नवंबर, 2013 को तलवार दंपत्ति को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। तलवार दंपत्ति ने अदालत के इस निर्णय को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

उच्च न्यायालय ने तलवार दंपत्ति को बरी करते हुए कहा था कि मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जांच ब्यूरो ने 8 मार्च को उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी। लेकिन मृतक घरेलू सेवक हेमराज की पत्नी खुमकला बंजादे ने इससे पहले ही तलवार तलवार दंपत्ति को बरी करने के निर्णय को चुनौती दे दी थी।

राफेल मामला: सोनिया गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों का संसद परिसर में प्रदर्शन

इस बीच, आरूषि-हेमराज हत्याकांड में फैसला सुनाने वाले विशेष न्यायाधीश श्याम लाल ने भी नौ फरवरी को उच्च न्यायालय के फैसले में उनके बारे में की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दी थी। यह फैसला सुनाने के चंद दिन बाद न्यायाधीश श्याम लाल सेवानिवृत्त हो गए थे।

श्याम लाल ने अपनी याचिका में कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले में उनकी आलोचना ‘अपमानजनक’ और ‘अनावश्यक’ थी। उन्होंने याचिका में कहा कि फैसले में उनके बारे में की गई प्रतिकूल टिप्पणियां एक निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायाधीश के रूप में उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित करेंगी, अत: इन्हें रिकार्ड से निकाला जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय के फैसले में कहा गया था कि निचली कोर्ट के न्यायाधीश ने इस मामले के साक्ष्यों और परिस्थितियों को सही मानते हुए इसे ‘गणित की पहेली’ की तरह सुलझाने का प्रयास किया। इसमें कहा गया था कि निचली अदालत के न्यायाधीश गणित के शिक्षक की तरह व्यवहार नहीं कर सकते।



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2018 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.