रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती: आज भी टैगोर की रचनाओं को किया जाता है खूब पसंद

Samachar Jagat | Tuesday, 07 May 2019 02:04:22 PM
Rabindranath tagore jayanti

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इंटरनेट डेस्क। आज कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती है। उनका जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। जब उनके पिता ने 1878 में कानून की पढ़ाई के लिए उन्हें लंदन भेजा, लेकिन साहित्य में रुचि के चलते टैगोर 1880 में बिना डिग्री लिए भारत वापस आ गए। 1921 में उन्होंने शांति निकेतन, पश्चिम बंगाल में ‘विश्व भारतीय यूनिवर्सिटी’ की नींव रखी।

नोबेल पुरस्कार प्राप्त टैगोर विश्व के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं को 2 देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने हजारों गीतों की रचना की। रवींद्र संगीत बांग्ला संस्कृति का अभिन्न अंग बन गया है। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत से प्रभावित उनके गीत मानवीय भावनाओं के कई रंग पेश करते हैं। गुरुदेव बाद के दिनों में चित्र भी बनाने लगे थे। रवींद्रनाथ ने अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, चीन सहित दर्जनों देशों की यात्राएं की थी। 7 अगस्त 1941 को देश की इस महान विभूति का देहावसान हो गया। 

रवीन्द्रनाथ टैगोर बाल्या अवस्था से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। उन्होंने बाल्या अवस्था में देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था और वे मानवता को विशेष महत्व देते थे। इसकी झलक उनकी रचनाओं में भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होती है।

रवीन्द्रनाथ टैगोर ने साहित्य, शिक्षा, संगीत, कला, रंगमंच और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अनूठी प्रतिभा का परिचय दिया। अपने मानवतावादी दृष्टिकोण की वजह से वे सही मायनों में विश्वकवि थे। साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने अपूर्व योगदान दिया और उनकी रचना गीतांजलि के लिए उन्हें साहित्य के नोबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

गुरुदेव सही मायनों में विश्वकवि होने की पूरी योग्यता रखते हैं। उनके काव्य के मानवतावाद ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई। दुनिया की तमाम भाषाओं में आज भी टैगोर की रचनाओं को पसंद किया जाता है। टैगोर की रचनाएं बांग्ला साहित्य में एक नई बहार लेकर आई। उन्होंने एक दर्जन से अधिक उपन्यास लिखे।



 

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