राष्ट्र प्रेम के लिए अपना पूरा जीवन कृर्बान करने वाली महिला थी सरोजिनी नायडू, जाने ये खास बाते

Samachar Jagat | Wednesday, 13 Feb 2019 09:31:37 AM
Sarojini Naidu, the woman who had her entire life in love for the nation, said these special words.

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इंटरनेट डेस्क:  सरोजिनी नायडू जिनका जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था भारत की स्वाधीनता को बल देने और इसके लिए अपना पूरा जीवन न्यौछावर करने वाली कई महिलाओं में से एक है सरोजिनी नायडू उनके पिता का नाम अघोरनाथ चट्टोपाध्याय जो बेहद बड़े विद्वान थे, उनकी माता एक कवयित्री थीं।


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ऐसे में अपने माता . पिता से मिले संस्कार उनके अंदर कूट कूट कर भरे थे, तभी तो उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी भारत की रक्षा में लगा दी सरोजिनी पढ़ाई में भी बेहद मेधावी रही कक्षा 12 वीं की परीक्षा उन्होंने अच्छे अंकों से पास की और 13 वर्ष की उम्र में लेडी ऑफ द लेक नामक कविता की रचना कर डाली सरोजिनी का पहला कविता संग्रह गोल्डन थ्रैशोल्ड था। उसके बाद वह पढ़ाई के साथ साथ कविताओं में रूचि दिखाने लगी और अपने दूसरे और तीसरे कविता संग्रह बर्ड ऑफ  टाईम और ब्रोकन विंग के जरीए उन्हे एक लोकप्रिय कवयित्री का दर्जा मिला, इसके बाद सन 1895 में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह इंग्लैंड  चली गई जहां उन्होंने आगे की शिक्षा ग्रहण की ।

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इसके बाद वर्ष 1914 में इंग्लैंड में वे पहली बार गांधीजी से मिलीं और उनके विचारों से बेहद प्रभावित हो गई गंाधीजी से मिलने के बाद सरोजिनी देश के लिए पूरी तरह से समर्पित होकर कार्य करने लगी इसके बाद उन्होंने कई राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और इस दौरान उन्होंने कई बार जेल भी जाना पड़ लेकिन उन्होंने अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी  सरोजिनी संकटों से न घबराते हुए वे एक धीर वीरांगना की तरह भारत के कई गांवों में देश प्रेम की अलख जगाने के लिए निकल गई  और भारत के लोगों को उनके कर्तव्य की याद दिलाती रही।

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उनकी जिंदगी में राष्ट्र प्रेम की अलख के साथ साथ एक समय खुशियों वाला भी आया साल  1898 में सरोजिनी नायडू का विवाह हो गया इसके बाद वह सरकार तंत्र से जुड़ गई जिसके कारण उन्हे यूपी में राज्यपाल के पद पर नियुक्त कर दिया गया। वह विस्तार और जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य था उन्होंने सौजन्य और गौरवपूर्ण व्यवहार के द्वारा अपने राजनीतिक कर्तव्यों को निभाया। 2 मार्च 1949 के दिन सरोजिनी नायडू का निधन हो गया।

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