किसानों के आक्रोश को समझो: शिव सेना

Samachar Jagat | Friday, 14 Dec 2018 06:24:44 PM
Shiv Sena said understand the Anger of the farmers

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मुंबई। देश भर के राजनीतिक दल हाल ही में हुए पांच राज्यों में संपन्न चुनावों का मंथन और विश्लेषण करने में लगे हुए हैं और मीडिया के लोग इसे प्राथमिकता से दिखा रहे हैं लेकिन राजनीति के इस कोलाहल में मराठवाडा के 855 किसानों की आत्महत्या पर भी सरकार में बैठे लोगों को विचार-मंथन करने की जरूरत है।


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शिव सेना पार्टी के मुखपत्र सामना के शुक्रवार  के संपादकीय में लिखा है कि जनवरी 2018 से नवंबर 2018 तक मराठवाडा में 855 किसानों ने आत्महत्या की है। कर्ज का बोझ, फसलों की बर्बादी, लगातार बारिश कमी, कर्जमाफी के उलझाने वाले नियम, कृषि उत्पादन का लागत दाम नहीं मिलने जैसी अनेक चिंताएं हैं जो किसानों को जीवन लीला समाप्त करने के लिए मजबूर कर देती हैं।

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सरकार की ओर से किसानों पर ध्यान नहीं देने से किसानों को लगता है कि यह सरकार उनकी नहीं है। किसानों को लगता है कि कोई भी सरकार आये, उनकी हालत में कोई बदलाव नहीं होगा, ऐसी भावना किसानों के मन में बैठ गई है। इन्हीं कारणों से मराठवाडा, विदर्भ और महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा है।

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उन्होंने कहा कि किसानों के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम को देखते हुए सरकार को कम से कम अब तो जागना होगा। अभी भी समय है किसानों के हित के लिए शीघ्र कदम उठाए जाएं अन्यथा हाल के चुनाव नतीजे दोहराएं जा सकते हैं।
 

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