बाल दिवस पर रस्म अदायगी और बयानबाजी नहीं, बल्कि बच्चों पर पैसे खर्च करें सरकारें: सत्यार्थी

Samachar Jagat | Tuesday, 13 Nov 2018 04:38:31 PM
Spend money on children's day, not rituals and rhetoric but children: Satyarthi

नयी दिल्ली। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने मंगलवार को कहा कि 14 नवंबर को बाल दिवस के मौके पर ‘रस्म अदायगी’ और ‘बयानबाजी’ करने की बजाय सरकारों को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर अधिक पैसे खर्च करने चाहिए।बाल दिवस की पूर्व संध्या पर सत्यार्थी ने यह भी कहा कि मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं से विश्वस्तर पर देश की बदनामी हो रही है और ऐसे में पूरे समाज को अपने भीतर चेतना पैदा करनी होगी।

उन्होंने ‘भाषा’ के साथ बातचीत में कहा, ‘‘बाल दिवस एक रस्म अदायगी हो गया है। इस दिन सिर्फ बयानबाजी होती है। 14नवंबर को बड़ी-बड़ी बातें होंगी। लेकिन मेरा कहना है कि जब तक सरकारें बच्चों को प्राथमिकता नहीं देंगी तब तक कुछ नहीं होने वाला है। बच्चों पर सरकारों को पैसा खर्च करना होगा।

‘कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन’ के प्रमुख ने कहा, ‘‘हमारे देश में 40 फीसदी आबादी 18 साल से कम उम्र की है। लेकिन हमारी सरकारें इन बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर साढ़े तीन फीसदी भी खर्च नहीं करती। आप सोचिए कितना अंतरविरोध है। यह सिर्फ आज के समय की सरकारों की बात नहीं है। यह पहले से चला आ रहा है।

मासूम बच्चियों से दुष्कर्म की कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए कहा इस तरह की घटनाओं से दुनिया भर में भारत की बदनामी होती। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा सिर्फ सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है। समाज को भी जागना होगा और अपने भीतर चेतना पैदा करनी होगी।’’

झारखंड के कुछ जिलों में अभ्रक की खदान वाले इलाकों में बाल मजदूरी पर अंकुश लगाने के मकसद से हाल ही में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रंस फाउंडेशन ने राज्य सरकार के साथ एक अनुबंध किया है। सत्यार्थी ने बताया झारखंड की सरकार और हमारे संगठन के बीच पांच साल का अनुबंध हुआ है। हमने यह तय किया है कि अभ्रक की खदान वाले इलाकों को बाल मजदूरी मुक्त किया जाए। हमारी कोशिश है कि हम कुछ वर्षों में इन इलाकों को अभ्रक की खदानों से मुक्त कर दें। इस संदर्भ में दोनों मिलकर काम करेंगे।

उधर, सत्यार्थी के जीवन और भारत में बाल अधिकारों की स्थिति पर बनी बनी 90 मिनट की डॉक्युमेंटरी ’’द प्राइस ऑफ फ्री’’ आगामी 27 नवंबर को यूट्यूब पर रिलीज हो रही है। इस फिल्म का निर्देशन डैरेग डोनीन ने किया है। इस बारे में सत्यार्थी ने कहा, ‘‘इस फिल्म में जरूर मेरे जीवन और काम के कुछ हिस्सों को दिखाया गया है, लेकिन इसका मकसद बाल अधिकारों के प्रति लोगों को प्रेरित करना है। यह दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं में उपलब्ध होगी। हम आशा करते हैं कि लोगों को इस फिल्म से बाल अधिकारों की सुरक्षा की प्रेरणा मिलेगी। एजेंसी



 

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