कॉमन सिविल कोड पर सुप्रीम कोर्ट ने गोवा की दी मिसाल

Samachar Jagat | Saturday, 14 Sep 2019 10:46:07 AM
Supreme Court gave example of Goa on Common Civil Code

इंटरनेट डेस्क। कॉमन सिविल कोड का अर्थ है कि समान नागरिक संहिता पर अब चर्चा होना प्रारंभ हो गया है। कोर्ट ने देश के सभी लोगों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू न होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि हिंदू लॉ 1956 में बनाया गया। लेकिन 63 साल बीत जाने के बाद भी पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयास नहीं किए गए।

इस दौरान कोर्ट ने गोवा की मिसाल दी। दरअसल, गोवा में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है। जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने गोवा के एक संपत्ति विवाद के मामले की सुनवाई कर रही थी। बेंच का फैसला लिखते हुए जस्टिस गुप्ता ने कहा कि भारतीय राज्य गोवा एक शानदार उदाहरण है, जिसने धर्म की परवाह किए बिना सभी के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया है। गोवा में जिन मुस्लिम पुरुषों की शादियां पंजीकृत हैं, वे बहुविवाह नहीं कर सकते हैं।

इस्लाम को मानने वालों के लिए मौखिक तलाक (तीन तलाक) का भी कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में यह समझना अहम है कि आखिर अकेले गोवा में कॉमन सिविल कोड कैसे लागू है? दरअसल, 1961 में भारत में शामिल होने के बाद गोवा, दमन और दीव के प्रशासन के लिए भारतीय संसद ने कानून पारित किया। गोवा, दमन और दीव एडमिनिस्ट्रेशन ऐक्ट 1962 और इस कानून में भारतीय संसद ने पुर्तगाल सिविल कोड 1867 को गोवा में लागू रखा। इस तरह से गोवा में समान नागरिक संहिता लागू हो गई। शुक्रवार को पीठ ने भी कहा कि गोवा राज्य में पुर्तगीज सिविल कोड 1867 लागू है, जिसके तहत उत्तराधिकार को लेकर कानून स्पष्ट हैं।

गोवा में लागू समान नागरिक संहिता के अंतर्गत वहां पर उत्तराधिकार, दहेज और विवाह के संबंध में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई के लिए एक ही कानून है। इसके साथ ही इस कानून में ऐसा प्रावधान भी है कि कोई माता-पिता अपने बच्चों को पूरी तरह अपनी संपत्ति से वंचित नहीं कर सकते। इसमें निहित एक प्रावधान यह भी है कि यदि कोई मुस्लिम अपनी शादी का पंजीकरण गोवा में करवाता है तो उसे बहुविवाह की अनुमति नहीं होगी।
 



 

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